सोनभद्र। जिला मुख्यालय के प्रमुख शहर राबर्ट्सगंज नगर में चाय-पान की दुकानों की तरह गली-मोहल्लों में खुले पैथोलॉजी सेंटर मरीजों की सेहत के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं। आलम यह है कि जिन केंद्रों पर रोजाना यूरिन जांच की जाती है, उनमें से अधिकांश के पास मरीजों के लिए शौचालय की बुनियादी व्यवस्था तक नहीं है। ऐसे में मरीजों को या तो घर से ही यूरिन का सैंपल लेकर आना पड़ता है या फिर जांच कराने में भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है।read more:https://khabarentertainment.in/prof-dr-rajendra-rajput-receives-guru-shree-2026-award-at-national-level-brings-honour-to-ghazipur/हैरानी की बात यह है कि पैथोलॉजी सेंटरों के पंजीकरण और संचालन के लिए निर्धारित मानकों में बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य हैं, लेकिन जिले में नियमों को ताक पर रखकर कई सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से समय-समय पर कागजों में सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त होने का दावा किया जाता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी कभी इन केंद्रों का वास्तविक निरीक्षण नहीं करते। यदि निरीक्षण होता भी है तो केवल औपचारिकता निभाई जाती है। यही वजह है कि बिना मूलभूत सुविधाओं वाले पैथोलॉजी सेंटर बेखौफ होकर मरीजों से जांच के नाम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मरीजों को सामान्य यूरिन जांच जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी घर से सैंपल लाने को मजबूर होना पड़े, तो ऐसे पैथोलॉजी सेंटरों की गुणवत्ता और स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर भरोसा कैसे किया जाए। जिले में धड़ल्ले से चल रहे ऐसे सेंटरों पर कार्रवाई कब होगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है। लोगों ने जिलाधिकारी से इस पर हस्तक्षेप की मांग किया है।