नई दिल्ली। भारत सरकार द्वारा ई-20 पेट्रोल के लॉन्च के बाद से यह सवाल लगातार पूछा जा रहा है कि क्या पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण (एथनॉल ब्लेंडिंग) को लागू करने में जल्दबाजी की गई है? आलोचकों का तर्क है कि ब्राजील जैसे देशों ने इस दिशा में दशकों तक शोध और विकास किया, जबकि भारत ने त्वरित गति से इसे अपनाया। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इन आशंकाओं को दूर करते हुए आधिकारिक आंकड़ों और ऐतिहासिक तथ्यों के साथ सिलसिलेवार जवाब प्रस्तुत किया है, जो इस कार्यक्रम की लंबी और सुविचारित यात्रा को दर्शाते हैं। मंत्रालय का कहना है कि भारत ने 2030 तक ई-20 पेट्रोल का लक्ष्य रखा था, जिसे पांच साल पहले, 2025 में ही प्राप्त कर लिया गया, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि इसमें जल्दबाजी की गई। वास्तव में, एथनॉल कोई नया ईंधन नहीं है; सदियों पहले हेनरी फोर्ड ने अपनी पहली कारों में एथनॉल का ही प्रयोग किया था। ब्राजील और अमेरिका जैसे कई देशों में तो दशकों से इस वैकल्पिक ईंधन का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा रहा है। भारत का कार्यक्रम भी एक दशक से अधिक पुराना है। read more:https://khabarentertainment.in/ghosiya-nagar-panchayats-entire-system-collapsed-during-just-five-minutes-of-rain/भारत में एथनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की जड़ें वर्ष 2001 में शुरू हुए एक पायलट प्रोजेक्ट से जुड़ी हैं। 2005 में इसकी आधिकारिक घोषणा की गई और 2006 में देश के कई राज्यों में 5 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण की शुरुआत भी हो गई। जनवरी 2013 में, एथनॉल नीति का एक सुदृढ़ ढांचा सार्वजनिक किया गया था, जो इस दिशा में सरकार की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हालांकि, वर्ष 2014 तक केवल 1.5 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य ही हासिल किया जा सका था, जो शुरुआती चुनौतियों की ओर इशारा करता है। वर्तमान में, भारत में एथनॉल उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने पर निर्भर है, और देश में लगभग 400 करोड़ लीटर एथनॉल का उत्पादन हो रहा है। वर्ष 2018 में, सरकार ने नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल की शुरुआत की, जिसने एथनॉल उत्पादन और उपयोग के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की। इस नीति के तहत पेट्रोलियम मंत्रालय, सड़क एवं परिवहन विभाग, रेलवे, तेल कंपनियां और विभिन्न विशेषज्ञ एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जो दर्शाता है कि यह एक बहुआयामी और समन्वित प्रयास है। वर्ष 2021 में, नीति आयोग ने एथनॉल ब्लेंडिंग के लिए एक विस्तृत रोडमैप जारी किया, जिसमें ऑटोमोबाइल उद्योग, तेल कंपनियों, कृषि विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों को शामिल किया गया। इस व्यापक भागीदारी का उद्देश्य सभी संबंधित पक्षों के साथ मिलकर लक्ष्य प्राप्त करना था। देश में 10 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य पूरा करने के लिए 500 से 600 करोड़ लीटर एथनॉल की आवश्यकता होती है, और जल्द ही देश में 1,200 करोड़ लीटर के उत्पादन का काम शुरू हो जाएगा। यह स्पष्ट है कि भारत में एथनॉल ब्लेंडिंग का काम रातों-रात शुरू नहीं किया गया, बल्कि यह लगभग ढाई दशक से चल रहे एक निरंतर प्रयास का परिणाम है। 2001 में शुरुआत, 2013 में नीति निर्माण, 2018 के बाद संस्थागत सुधार, 2021 के बाद निवेश, और 2025 तक राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन – यह सब एक दीर्घकालिक और योजनाबद्ध रणनीति को दर्शाता है। ऐसे में, एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम को जल्दबाजी में लागू करने के आरोप ठोस आधार पर खरे नहीं उतरते हैं, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय लक्ष्यों की दिशा में एक सोची-समझी पहल है।