गौशाला निरीक्षण में मिलीं खामियां, डीएम सख्त—लापरवाही पर वेतन रोकने और नोटिस के निर्देश

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फर्रुखाबाद जनपद की गौशालाओं में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की दिशा में जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। इसी क्रम में उन्होंने कान्हा गौशाला, सकबाई का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया और कई गंभीर खामियां उजागर होने पर जिम्मेदार अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए।  निरीक्षण के दौरान सामने आया कि गौशाला में 461 गौवंश दर्ज हैं, जबकि देखरेख के लिए 15 केयरटेकर तैनात हैं। मौके पर केवल 11 कर्मचारी ही उपस्थित मिले, जबकि शेष चार अवकाश पर थे। व्यवस्थाओं की जांच के दौरान कई अहम रजिस्टर—जैसे स्टॉक, टैगिंग, चिकित्सा, निरीक्षण और वैक्सीनेशन—उपलब्ध नहीं मिले, जिस पर जिलाधिकारी ने नाराजगी जताई। गौशाला में लगे सीसीटीवी कैमरे भी बंद पाए गए, जिसे सुरक्षा और निगरानी के लिहाज से गंभीर लापरवाही माना गया। वहीं निरीक्षण के समय नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी की अनुपस्थिति ने मामले को और गंभीर बना दिया। इस पर डीएम ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनके खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने और अगले आदेश तक वेतन रोकने के निर्देश दिए।read more:https://pahaltoday.com/organization-expansion-of-bhakiyu-non-political-nomination-of-many-officials/पेयजल व्यवस्था के तहत दो समर (जल उपकरण) चालू हालत में मिले, जबकि दो पानी की टंकियां निर्माणाधीन पाई गईं। केयरटेकरों ने जानकारी दी कि गौवंश को नियमित रूप से दिन में दो बार भूसा और करीब 40 कुंतल हरा चारा दिया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान मौजूद सहायक अभियंता विशाल सिंह भी आवश्यक जानकारी देने में असमर्थ रहे, जिस पर जिलाधिकारी ने उनके खिलाफ प्रतिकूल प्रविष्टि दर्ज करने और वेतन रोकने के निर्देश दिए। व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए डीएम ने कई अहम निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि केयरटेकरों की ड्यूटी दिन और रात की शिफ्ट में व्यवस्थित की जाए, चारे और भूसे का सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित किया जाए, तथा सभी रजिस्टर नियमित रूप से अपडेट रखे जाएं। इसके साथ ही गौशाला परिसर में व्यापक वृक्षारोपण कर पशुओं के लिए छाया और पर्यावरण संरक्षण दोनों सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिलाधिकारी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि गौशालाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से सभी कमियों को दूर करने और नियमित निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए, ताकि गौवंश के संरक्षण में किसी भी प्रकार की कमी न रहे।

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