धामपुर। भीषण गर्मी और सिंचाई के चरम समय में बिजली व्यवस्था ने किसानों की कमर तोड़ दी है। भारतीय किसान यूनियन (अराजनीतिक) की मासिक पंचायत इस बार सीधे-सीधे ‘बिजली बनाम किसान’ की जंग में बदल गई। पंचायत में गूंजा “वादे 12 घंटे के, हकीकत 6 घंटे की!” और इसी के साथ प्रशासन व बिजली विभाग के खिलाफ तीखा रोष फूट पड़ा।read more:https://pahaltoday.com/shri-shyam-parivars-public-service-campaign-begins-with-the-pledge-of-service-is-the-supreme-religion/ अघोषित कटौती: कागज़ों में आपूर्ति, खेतों में सूखा कुशलवीर व दुष्यंत कुमार आदि किसानों का आरोप है कि सरकार 10–12 घंटे बिजली देने का दावा करती है, लेकिन जमीनी सच्चाई 6–8 घंटे की है। नतीजा गन्ने की फसलें सूखने की कगार पर हैं और किसान बर्बादी के मुहाने पर खड़े हैं। सवाल उठ रहा है: “जब पानी नहीं, तो फसल कैसे बचे?” स्मार्ट मीटर बना ‘स्मार्ट लूट’ का प्रतीक? पंचायत में प्रीपेड स्मार्ट मीटर को लेकर गुस्सा चरम पर दिखा। किसानों का आरोप ये है कि मीटर सामान्य मीटर से तेज चलते हैं और बिल दोगुना-तिगुना आ रहा है। कई किसानों ने इसे “डिजिटल लूट” तक करार दिया और तत्काल हटाने की मांग उठाई। लो वोल्टेज और जर्जर ट्रांसफार्मर: सिस्टम फेल ग्रामीण इलाकों में वोल्टेज इतना कम है कि ट्यूबवेल और सबमर्सिबल पंप जवाब दे रहे हैं। ऊपर से खराब ट्रांसफार्मर समस्या को और गंभीर बना रहे हैं। किसानों ने कहा “बिजली है भी तो बेकार है।”निजीकरण के खिलाफ बिगुल पूरे उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के खिलाफ भी पंचायत में कड़ा विरोध दर्ज हुआ। किसानों का मानना है कि निजीकरण से बिजली और महंगी होगी, जबकि सुविधाएं और बदतर होंगी। अल्टीमेटम और चेतावनी किसानों ने साफ चेतावनी दी है। यदि जल्द बिजली आपूर्ति में सुधार, स्मार्ट मीटर की समीक्षा और ट्रांसफार्मर व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो आंदोलन सड़कों से होते हुए बड़े स्तर पर जाएगा। धामपुर में बिजली अब सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि किसानों के अस्तित्व का सवाल बन चुकी है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो यह आक्रोश बड़े किसान आंदोलन का रूप ले सकता है।