पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाला समेत 9 लोगों पर मुकदमा दर्ज

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मिर्जापुर/सहारनपुर। फतेहपुर टांडा क्षेत्र स्थित एक स्टोन क्रेशर को लेकर चल रहे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। ग्राम प्रधान की शिकायत पर पुलिस ने पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाला सहित नौ लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष विवेचना कर तथ्यों के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। ग्राम प्रधान पारस द्वारा कोतवाली में दी गई तहरीर में आरोप लगाया गया है कि गांव के निकट संचालित एक स्टोन क्रेशर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अवैध खनन, स्टोन क्रेशर संचालन और राजस्व चोरी जैसे कार्य कर रहा है। शिकायत में कहा गया है कि क्रेशर से निकलने वाली धूल और प्रदूषण के कारण गांव में संक्रामक रोग फैलने की आशंका बनी हुई है तथा ग्रामीणों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तहरीर के अनुसार जब ग्रामीणों की ओर से स्टोन क्रेशर संचालकों से शिकायत की गई तो उन्हें कथित रूप से जान से मारने की धमकी दी गई।read more:https://khabarentertainment.in/cattle-found-below-standards-and-shortage-of-fodder-observed-during-sdms-surprise-inspection/शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि स्टोन क्रेशर संचालकों के संबंध पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाला, उनके दोनों पुत्र जावेद और अफजाल तथा उनके भाई सहित अन्य लोगों से हैं, जिनके प्रभाव के कारण विरोध करने वालों को डराया-धमकाया जा रहा है। यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित लोग कई फर्मों में भागीदार हैं और प्रभाव का दुरुपयोग कर रहे हैं। पुलिस ने शिकायत के आधार पर सुशील कुमार निवासी अंबाला (हरियाणा), पूर्व एमएलसी हाजी इकबाल उर्फ बाला, उनके पुत्र जावेद और अफजाल, राव लईक, आनंद कुमार, महमूद, रविंद्र तथा मंदीप के विरुद्ध जान से मारने की धमकी देने, कथित धोखाधड़ी और अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। क्षेत्राधिकारी प्रिया यादव ने बताया कि ग्राम प्रधान की तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है और विवेचना में जो भी तथ्य एवं साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने स्पष्ट किया कि जांच निष्पक्ष एवं कानून के दायरे में रहकर की जाएगी। यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों की निगाहें अब पुलिस जांच पर टिकी हैं कि विवेचना में क्या तथ्य सामने आते हैं और आगे क्या कार्रवाई होती है।

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