बॉम्बे हाई कोर्ट ने अग्निवीर मुरली नाइक के परिवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार पर कड़ी नाराज़गी जता

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– अग्निवीर मुरली नाइक की शहादत के बाद भी उनका परिवार कर रहा न्याय का इंतजार

मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान शहीद हुए मुंबई के अग्निवीर मुरली नाइक के परिवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार पर कड़ी नाराज़गी जताई है। अदालत ने साफ कहा कि अगर तय समय में जवाब दाखिल नहीं किया गया, तो भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा। आपको बता दें कि जम्मू-श्मीर में पूँछ जिले में 9 मई 2025 को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान सीमा पार से हुई फायरिंग में अग्निवीर मुरली नाइक शहीद हो गए थे। वे मुंबई के घाटकोपर इलाके के कामराज नगर के निवासी थे। उनकी मां ज्योतिबाई नाइक ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की है कि अग्निवीरों को भी नियमित सैनिकों की तरह मरणोपरांत लाभ-जैसे पेंशन और अन्य कल्याणकारी सुविधाएं दी जाएं। न्यायाधीश रविंद्र घुगे और न्यायाधीश हितेन वेनेगांवकर की खंडपीठ ने पाया कि पहले भी दिसंबर और जनवरी में केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को 7 मई तक अंतिम मौका देते हुए कहा कि समय पर जवाब नहीं देने पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा

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https://pahaltoday.com/barabanki-festival-will-be-inaugurated-from-april-10/। राज्य सरकार को भी जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। अब मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी। – क्या मांग है याचिका में ? याचिका में कहा गया है कि अग्निवीर भी देश के सैनिक हैं और समान जोखिम उठाते हैं इसके बावजूद उन्हें पेंशन और दीर्घकालीन लाभ नहीं मिलते। यह अग्निपथ स्कीम के तहत भेदभावपूर्ण व्यवस्था है। परिवार की मांग है कि अग्निवीरों के परिजनों को नियमित सैनिकों की तरह फैमिली पेंशन, संस्थागत मान्यता, अन्य कल्याणकारी सुविधाएं दी जाएं। – अग्निवीर मुरली नाइक की शहादत के बाद भी उनका परिवार कर रहा न्याय का इंतजार मुरली नाइक की शहादत के बाद भी उनका परिवार अब तक न्याय का इंतजार कर रहा है। शहादत से कुछ घंटे पहले ही मुरली ने अपनी मां से वीडियो कॉल पर बात की थी और घर का हालचाल लिया था। उनकी शहादत की खबर मिलते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। मुरली बचपन से ही देशसेवा के लिए समर्पित थे और उन्होंने सैन्य जीवन को अपना लक्ष्य बनाया था। बहरहाल यह मामला न सिर्फ एक परिवार के न्याय की लड़ाई है, बल्कि देशभर के अग्निवीरों के अधिकारों से जुड़ा अहम मुद्दा बनता जा रहा है।

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