सोनभद्र। बिल्ली-मारकुंडी स्थित संतोष अग्रहरी की लीज भूमि को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार, 13 सितंबर 1989 को संतोष अग्रहरी द्वारा लिखित रूप से दावा किया गया था कि उक्त भूमि पर उनका और उनके परिवार का 15 से 20 वर्षों से कब्जा है। यदि इस दावे को सही माना जाए तो वर्ष 1989 से 20 वर्ष पीछे जाने पर कब्जा लगभग 1969 से माना जाएगा। यानी आज तक इस कथित कब्जे की अवधि करीब 57 वर्ष बैठती है। चैंकाने वाली बात यह है कि वर्तमान में संतोष अग्रहरी की अनुमानित आयु लगभग 54 वर्ष बताई जा रही है। इस हिसाब से यदि 57 वर्ष पूर्व कब्जा माना जाए तो उनका जन्म होने से करीब 3 वर्ष पहले ही भूमि पर उनका कब्जा साबित होता है, जो स्वाभाविक रूप से संदेह पैदा करता है।read more:https://pahaltoday.com/smuggling-network-exposed-again-at-the-border-nepalese-smuggler-arrested-in-major-ssb-operation/यह तथ्य साफ संकेत देता है कि भूमि संबंधी अभिलेखों एवं दावों में कहीं न कहीं गंभीर विसंगति अथवा फर्जीवाड़ा हुआ है। अब यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किस आधार पर यह दावा स्वीकार किया गया और किन अधिकारियों की संस्तुति पर लीज प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। स्थानीय लोगों में इस मामले को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। लोगों की मांग है कि पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा यदि दस्तावेज फर्जी पाए जाएं तो जिम्मेदार व्यक्तियों एवं संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।