कानपुर देहात, मुख्य विकास अधिकारी विधान जायसवाल की अध्यक्षता में जनपद में उर्वरक की उपलब्धता, वितरण व्यवस्था एवं गुणवत्ता की समीक्षा के संबंध में विकास भवन में बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिला विकास अधिकारी, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, उप कृषि निदेशक, जिला कृषि अधिकारी, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, भूमि संरक्षण अधिकारी, क्षेत्रीय प्रबंधक इफको, पीसीएफ के सहायक, थोक उर्वरक विक्रेता दीप सेल्स कॉरपोरेशन, जय मां कुष्मांडा, सुशील ट्रेडर्स, राधा माधव कंस्ट्रक्शन सहित अन्य थोक उर्वरक विक्रेताओं एवं जनपद स्तरीय कंपनी प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया।बैठक में मुख्य विकास अधिकारी ने समस्त उर्वरक कंपनियों एवं थोक विक्रेताओं को निर्देशित किया कि उर्वरक की रैक प्राप्त होने पर उसका एक्नॉलेजमेंट निर्धारित समय पर अनिवार्य रूप से किया जाए। उर्वरक की बोरियों के वजन में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूरिया का बैग 45 किलोग्राम तथा डीएपी एवं अन्य उर्वरकों के बैग 50 किलोग्राम के निर्धारित मानक के अनुसार होने चाहिए। कृषकों को उर्वरक का वितरण निर्धारित दर पर ही किया जाए तथा किसी भी प्रकार की जबरन टैगिंग न की जाए।उन्होंने सभी उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिए कि प्रतिष्ठानों पर प्रतिदिन स्टॉक बोर्ड एवं रेट बोर्ड अद्यतन रखें तथा स्टॉक एवं वितरण रजिस्टर का नियमित रूप से रखरखाव सुनिश्चित करें।read more:https://pahaltoday.com/district-magistrate-holds-meeting-of-the-district-drinking-water-and-sanitation-mission-issues-directives/ कृषकों को उनकी जोतबही, फसल एवं कृषि संस्तुतियों के आधार पर आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। निर्धारित मानक के अनुसार पांच बोरी डीएपी एवं सात बोरी यूरिया तक का वितरण जोतबही एवं फसल की संस्तुति के आधार पर किया जाए।मुख्य विकास अधिकारी ने यह भी निर्देशित किया कि पीओएस मशीन में दर्ज स्टॉक एवं भौतिक स्टॉक में किसी भी प्रकार का अंतर नहीं होना चाहिए। उर्वरक का वितरण पीओएस मशीन के माध्यम से आधार ऑथेंटिकेशन द्वारा ही किया जाना अनिवार्य है, जिससे वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे और वास्तविक कृषकों को समय से उर्वरक उपलब्ध हो सके।बैठक में उप कृषि निदेशक एवं जिला कृषि अधिकारी को निर्देशित किया गया कि जनपद के उर्वरक प्रतिष्ठानों का समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जाए तथा उर्वरकों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित रूप से नमूने भी संग्रहित किए जाएं।इस अवसर पर जिला कृषि अधिकारी प्राची पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि उर्वरक विक्रेताओं के लिए शासन द्वारा निर्धारित सभी नियमों एवं निर्देशों का अनुपालन अनिवार्य है। किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के अंतर्गत विधिक कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए संबंधित उर्वरक विक्रेता स्वयं उत्तरदायी होंगे।