बिजनौर। किसानों को निर्धारित दरों पर गुणवत्तायुक्त खाद उपलब्ध कराने और उर्वरक वितरण में अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए जिला प्रशासन ने बुधवार को जनपदभर में व्यापक छापेमारी अभियान चलाया। जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह, तहसीलदार धामपुर विपिन कुमार सहित विभिन्न तहसीलों के अधिकारियों की संयुक्त टीमों ने उर्वरक विक्रय केंद्रों और गोदामों का निरीक्षण किया। अभियान के दौरान 48 प्रतिष्ठानों की जांच की गई और खाद की गुणवत्ता परखने के लिए 19 नमूने लिए गए। अनियमितताएं मिलने पर पांच विक्रेताओं के खिलाफ कार्रवाई की गई, जबकि अन्य को नोटिस जारी करने की प्रक्रिया अपनाई गई।
जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह के अनुसार, शासन और जिलाधिकारी के निर्देश पर चलाए गए अभियान का उद्देश्य किसानों को यूरिया, डीएपी, एनपीके सहित अन्य उर्वरक निर्धारित दरों पर उपलब्ध कराना है। निरीक्षण के दौरान दुकानों की स्थिति, बिक्री संबंधी अभिलेख और उर्वरक वितरण व्यवस्था की जांच की गई।
निरीक्षण के दौरान भूतपुरी, धामपुर स्थित मैसर्स महालक्ष्मी खाद भंडार और अफजलगढ़, धामपुर स्थित मैसर्स बद्री कृपा खाद भंडार बंद मिले। इस पर दोनों प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई।वहीं, अभिलेख अपूर्ण पाए जाने पर मैसर्स कुमार बीज भंडार, मैसर्स किसान बीज भंडार और मैसर्स एग्री क्लिनिक एंड एग्री बिजनेस सेंटर, धामपुर के विरुद्ध कारण बताओ नोटिस और निलंबन संबंधी कार्रवाई की गई। अभिलेख प्रस्तुत नहीं करने पर मैसर्स मोहन ट्रेडर्स, धामपुर का उर्वरक प्राधिकार पत्र निलंबित कर दिया गया।
पीओएस मशीन से बिक्री और रसीद देना अनिवार्य
अधिकारियों ने उर्वरक विक्रेताओं को निर्देश दिए कि किसानों की वास्तविक जरूरत और फसलवार संस्तुतियों के अनुसार ही खाद का वितरण किया जाए। प्रत्येक बिक्री पीओएस मशीन के माध्यम से करने, वितरण रजिस्टर में आवश्यक विवरण दर्ज करने और किसानों को खरीद की रसीद या कैश मेमो देने के निर्देश दिए गए।
साथ ही किसानों की जोतबही या खतौनी के आधार पर आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराने और अनावश्यक थोक बिक्री से बचने को कहा गया।
ओवररेटिंग और जबरन टैगिंग पर चेतावनी
निरीक्षण के दौरान निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर खाद बेचने और मुख्य उर्वरकों के साथ अन्य उत्पाद जबरन देने यानी टैगिंग का कोई मामला सामने नहीं आया। इसके बावजूद अधिकारियों ने विक्रेताओं को चेतावनी दी कि ओवररेटिंग, कालाबाजारी या नियमों के विरुद्ध टैगिंग की शिकायत मिलने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत कार्रवाई की जाएगी।जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह ने स्पष्ट किया कि किसानों को समय पर उचित मूल्य पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराना विभाग की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि उर्वरक बिक्री में पारदर्शिता बनाए रखने और अनियमितताओं पर अंकुश लगाने के लिए निरीक्षण एवं प्रवर्तन अभियान आगे भी जारी रहेगा।
रबी फसलों के बीज पर मिलेगा 100 फीसदी तक अनुदान
रबी फसल की बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए राहत भरी खबर है। कृषि विभाग ने रबी अभियान 2026 के तहत गेहूं, चना, मटर, मसूर, तोरिया और राई-सरसों के उन्नतशील बीजों का वितरण शुरू कर दिया है। किसानों को विभिन्न योजनाओं के तहत बीजों पर 50 से 100 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा। जिला कृषि अधिकारी ने किसानों से विभागीय पोर्टल पर बुकिंग कराने के बाद राजकीय कृषि निवेश भंडारों से बीज प्राप्त कर योजना का लाभ उठाने की अपील की है।जिला कृषि अधिकारी के अनुसार, गेहूं की 10 वर्ष से कम अवधि वाली प्रजातियों पर निर्धारित विक्रय मूल्य का 50 प्रतिशत, अधिकतम 2,600 रुपये तथा 10 वर्ष से अधिक अवधि वाली प्रजातियों पर 50 प्रतिशत, अधिकतम 1,300 रुपये प्रति कुंतल तक अनुदान मिलेगा। दोनों मामलों में निर्धारित नियमानुसार जो राशि कम होगी, उतना ही अनुदान देय होगा।
भारत सरकार के पल्स मिशन के तहत चना, मटर और मसूर के बीज भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। जिले में चना बीज की 24 कुंतल और मटर के प्रमाणित बीज की तीन कुंतल मात्रा उपलब्ध है। चना और मटर की आठ वर्ष से कम अवधि वाली प्रजातियों पर निर्धारित विक्रय मूल्य का 75 प्रतिशत, अधिकतम 6,000 रुपये प्रति कुंतल तक अनुदान मिलेगा। वहीं, आठ से दस वर्ष की अवधि वाली प्रजातियों पर 50 प्रतिशत, अधिकतम 4,000 रुपये प्रति कुंतल तक अनुदान देय होगा।
मसूर के 36 कुंतल बीज उपलब्ध हैं। आठ वर्ष से कम अवधि वाली प्रजातियों पर निर्धारित विक्रय मूल्य का 100 प्रतिशत, अधिकतम 10,948 रुपये प्रति कुंतल तक अनुदान दिया जाएगा। आठ से दस वर्ष की अवधि वाली प्रजातियों पर 75 प्रतिशत, अधिकतम 8,211 रुपये प्रति कुंतल तक अनुदान मिलेगा।
तिलहनी फसलों के बीज पर भी राहत
रबी अभियान के तहत तोरिया और राई-सरसों की उन्नतशील प्रजातियों के बीज पर भी अनुदान की व्यवस्था की गई है। तोरिया की 15 वर्ष तक की प्रजातियों और राई-सरसों की उन्नतशील प्रजातियों पर निर्धारित विक्रय मूल्य का 50 प्रतिशत, अधिकतम 5,500 रुपये प्रति कुंतल तक अनुदान दिया जाएगा।
बुकिंग के बाद मिलेगा बीज
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि सभी बीज जनपद के राजकीय कृषि निवेश भंडारों पर उपलब्ध हैं। किसान विभागीय यूपी एग्रीकल्चर के दर्शन-2 पोर्टल पर बुकिंग कराने के बाद बीज प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने किसानों से उन्नतशील प्रजातियों की बुवाई कर बेहतर उत्पादन प्राप्त करने और सरकारी अनुदान योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की है।