दूध से पनीर तक संरक्षण की वैज्ञानिक तकनीक जरूरी : प्रो. सुधीर सिंह

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जौनपुर। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के विज्ञान संकाय में संचालित फूड साइंस एंड टेक्नोलॉजी पाठ्यक्रम के विद्यार्थियों के लिए कुलपति प्रो. राकेश कुमार सिंह के निर्देश पर ‘दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों के संरक्षण’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के पूर्व वैज्ञानिक प्रो. सुधीर सिंह ने विद्यार्थियों को दुग्ध एवं विभिन्न दुग्ध उत्पादों के संरक्षण की वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक तकनीकों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मानव द्वारा दुग्ध एवं दुग्ध उत्पादों का बड़ी मात्रा में सेवन किया जाता है। ऐसे में इनकी गुणवत्ता, पोषणात्मक मूल्य और खाद्य सुरक्षा बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। दूध, पनीर के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाना जरूरी है।प्रो. सुधीर सिंह ने कहा कि दुग्ध अत्यधिक शीघ्र खराब होने वाला खाद्य पदार्थ है। इसकी गुणवत्ता, पोषणात्मक मूल्य एवं सुरक्षित शेल्फ लाइफ बनाए रखने के लिए उचित प्रसंस्करण, ताप उपचार, शीत भंडारण, स्वच्छता और प्रभावी पैकेजिंग अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।उन्होंने विशेष रूप से दूध, पनीर और बटर के संरक्षण की तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignetteपनीर के संदर्भ में उन्होंने इसके निर्माण, नमी नियंत्रण, स्वच्छता, पैकेजिंग, शीत भंडारण तथा गुणवत्ता बनाए रखने के उपायों की जानकारी दी। वहीं बटर के संरक्षण में तापमान नियंत्रण, उचित पैकेजिंग, ऑक्सीकरण से सुरक्षा तथा भंडारण की उपयुक्त परिस्थितियों के महत्व को समझाया।उन्होंने विद्यार्थियों को बटर, क्रीम, मिल्क पाउडर सहित अन्य दुग्ध उत्पादों के संरक्षण एवं उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए अपनाई जाने वाली आधुनिक तकनीकों से भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक संरक्षण तकनीकों का उपयोग न केवल खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि दुग्ध उत्पादों के मूल्यवर्धन और उनके व्यावसायिक उपयोग की संभावनाओं को भी बढ़ाता है।व्याख्यान के दौरान विद्यार्थियों ने दूध, पनीर, बटर एवं अन्य दुग्ध उत्पादों के प्रसंस्करण और संरक्षण से संबंधित विभिन्न प्रश्न पूछे, जिनका प्रो. सुधीर सिंह ने विस्तारपूर्वक समाधान किया।कार्यक्रम के अंत में संकायाध्यक्ष प्रो. प्रदीप कुमार ने प्रो. सुधीर सिंह के प्रति आभार व्यक्त किया।

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