आधुनिकता की चकाचौंध में भी जिंदा है गांव की चौपालों का पुराना लोक गीत

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बहराइच ( पयागपुर )। बदलती आधुनिकता और चकाचौंध के दौर में जहां गांवों की चौपालें और सार्वजनिक स्थलों पर होने वाली पारंपरिक बैठकों का चलन धीरे-धीरे विलुप्त होता जा रहा है, वहीं पयागपुर क्षेत्र में कुछ लोग आज भी पुरानी लोक परंपराओं को जीवंत रखने का प्रयास कर रहे हैं।पयागपुर पुराने थाने के सामने क्षेत्र के अलग-अलग स्थानों से जुटे लोगों ने ढोलक की थाप और पारंपरिक लोकगीतों के माध्यम से पुराने दौर की यादें ताजा कर दीं। कमला प्रसाद तिवारी, उदयभान शर्मा सहित क्षेत्र के अन्य लोगों ने लोकगीतों की प्रस्तुति देकर माहौल को गुलजार कर दिया।read morre:https://pahaltoday.com/ballia-police-receive-two-modern-interceptor-bikes-sp-omvir-singh-flags-them-off/ढोलक की थाप के साथ गूंजते पारंपरिक गीतों ने लोगों को उस दौर की याद दिला दी, जब गांव की चौपालें सामाजिक मेलजोल, आपसी भाईचारे और लोक संस्कृति की पहचान हुआ करती थीं। बुजुर्गों का कहना है कि पहले शाम होते ही गांव की चौपालों और सार्वजनिक स्थानों पर लोग एकत्र होते थे। लोकगीत, किस्से-कहानियां और पारंपरिक गीत-संगीत लोगों के मनोरंजन का प्रमुख साधन हुआ करते थे।आयोजित लोकगीत कार्यक्रम में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और पुरानी परंपराओं को याद करते हुए कहा कि आधुनिकता के साथ अपनी लोक संस्कृति, परंपरा और गांव की सामाजिक विरासत को भी बचाए रखना जरूरी है। ऐसी प्रस्तुतियां नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का काम करती है l

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