महिला सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी: दिल्ली पुलिस

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प्रेम कुमार/ नितिन गुप्ता नई दिल्ली, डॉ. भीमराव अम्बेडकर महाविद्यालय में शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, दिल्ली प्रांत, दिल्ली पुलिस एवं आंतरिक शिकायत समिति के सयुक्त तत्वावधान में 112 आपातकालीन हेल्पलाइन एवं महिला सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्राओं एवं महिलाओं को आपातकालीन परिस्थितियों में उपलब्ध सहायता, कानूनी अधिकारों, सुरक्षा उपायों तथा शिकायत निवारण की प्रक्रिया के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम के दौरान महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी, सामाजिक एवं व्यावहारिक पहलुओं पर विस्तार से जानकारी साझा की गई। विद्यार्थियों को 112 आपातकालीन हेल्पलाइन के महत्व, आपात स्थिति में सहायता प्राप्त करने की प्रक्रिया तथा महिलाओं के लिए उपलब्ध सुरक्षा तंत्र के बारे में बताया गया।महाविद्यालय प्राचार्य प्रो. सदानंद प्रसाद ने महिला सुरक्षा को समाज की सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए कहा कि महिला सुरक्षा केवल एक सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने कहा कि जागरूकता, सम्मान और सुरक्षित वातावरण के निर्माण से ही हम महिलाओं को सशक्त एवं निर्भय समाज दे सकते है।कार्यक्रम की पीठासीन अधिकारी प्रो. ममता ने महिलाओं को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहने का संदेश देते हुए कहा कि महिला जागरूकता की शुरुआत अपने अधिकारों और अपनी सुरक्षा के प्रति सजग होने से होती है।read more:https://pahaltoday.com/ballia-police-receive-two-modern-interceptor-bikes-sp-omvir-singh-flags-them-off/हर महिला को अपनी आवाज उठाने, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का अधिकार है। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि डॉ. मधु मिश्रा ने महिला सुरक्षा एवं अधिकारों के प्रति जागरूकता को आवश्यक बताते हुए कहा कि महिलाओं को अपने कानूनी अधिकारों की जानकारी होनी चाहिए। डॉ. मधु ने कहा कि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता प्राप्त करने के लिए उपलब्ध हेल्पलाइन का सही उपयोग करना चाहिए।विशिष्ट अतिथि डॉ. सीमा सिंह ने कहा कि महिला सुरक्षा केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जागरूकता, कानूनी जानकारी और समय पर सहायता महिलाओं को सुरक्षित एवं सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे।सतर्कता अभियान समन्वयक प्रो. दीपाली जैन ने सुरक्षित वातावरण के निर्माण में समाज की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि सुरक्षित समाज वही है, जहाँ महिलाओं को समान सम्मान, अवसर और स्वतंत्रता मिले। महिलाओं की सुरक्षा के लिए जागरूकता के साथ-साथ परिवार, संस्थान और समाज सभी की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।इंस्पेक्टर संजीव वर्मा ने महिला सुरक्षा में कानून और जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिला सुरक्षा के लिए कानून के साथ जागरूकता भी बेहद जरूरी है। इंस्पेक्टर वर्मा ने कहा कि किसी भी तरह की परेशानी या उत्पीड़न की स्थिति में चुप न रहें, अपनी बात सामने रखें और उपलब्ध कानूनी सहायता का इस्तेमाल करें।कार्यक्रम संयोजक डॉ. राजबाला गौतम ने महिला उत्पीड़न, साइबर माध्यमों से होने वाली परेशानियों, शिकायत दर्ज कराने के अधिकार, आपातकालीन सहायता तथा व्यक्तिगत सुरक्षा एवं सतर्कता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान केंद्रित की। उन्होंने कहा है किसी भी अप्रिय परिस्थिति में उचित और समयबद्ध कदम उठाने की व्यावहारिक समझ विकसित करने पर भी जोर दिया।

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