बाराबंकी। रामनगर तहसील क्षेत्र के हेतमापुर गांव में सरयू (घाघरा) नदी की कटान रोकने के सरकारी काम में नाबालिग बच्चों से मजदूरी कराए जाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि 13-14 वर्ष की उम्र के बच्चों से नदी किनारे जोखिम भरे काम कराए जा रहे थे। बच्चे ईंटों से भरी बोरियां उठाकर नदी में डालते दिखाई दिए। मामला सामने आने के बाद बाढ़ खंड के सहायक अभियंता ने ठेकेदार को बुलाकर नाबालिगों को काम से हटाने के निर्देश दिए। नदी के जलस्तर में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच कटान रोकने के लिए हेतमापुर क्षेत्र में तेजी से काम चल रहा है। एल्गिन ब्रिज पर नदी का पानी खतरे के निशान के करीब पहुंचने के चलते तटबंध और आसपास की आबादी को सुरक्षित रखने के लिए बोरियों में ईंटें भरकर उन्हें सिलने के बाद नदी में डाला जा रहा है। मौके पर काम कर रहे 14 वर्षीय सलमान ने बताया कि एक बोरी में ईंट भरने, उसे सिलने और नदी में डालने के बदले पांच रुपये मजदूरी तय है। उसके अनुसार वह दिनभर काम कर रहा है, लेकिन अभी तक मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है।read more:https://pahaltoday.com/villagers-upset-over-garbage-dumping-staged-a-protest-at-the-district-collectorate/13 वर्षीय सतीश समेत अन्य बच्चों ने भी पांच रुपये प्रति बोरी के हिसाब से काम कराए जाने की बात बताई। तेज बहाव वाली नदी के किनारे ईंटों से भरी बोरियां उठाकर ले जाना बच्चों के लिए बेहद जोखिम भरा है। ऐसे में नाबालिगों से यह काम कराए जाने से सरकारी कार्य की निगरानी और बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। नदी की कटान से हेतमापुर और केदारीपुर के ग्रामीण भी परेशान हैं। कई ग्रामीण अपने पक्के मकानों को कटान की चपेट में आने से बचाने के लिए उन्हें तोड़कर ईंटें निकाल रहे हैं। वहीं कुछ ग्रामीण कच्ची फसल काटकर बाढ़ और कटान से होने वाले नुकसान को कम करने में जुटे हैं। मामले की जानकारी मिलने पर मौके पर मौजूद बाढ़ खंड के सहायक अभियंता नितिन पांडे ने ठेकेदार को बुलाया और नाबालिग बच्चों को तत्काल काम से हटाने के निर्देश दिए। हालांकि सरकारी बाढ़ सुरक्षा कार्य में बच्चों को पांच रुपये प्रति बोरी की मजदूरी पर जोखिम भरे काम में लगाए जाने को लेकर विभागीय निगरानी और ठेकेदारी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। अब यह जांच का विषय है कि सरकारी कार्य में नाबालिगों को किसकी अनुमति से लगाया गया और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी। मामले में संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार की भूमिका की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।