सोनभद्र। जनपद में लगातार हो रही बारिश के चलते बांधों, नदियों और पहाड़ी जलधाराओं का जलस्तर बढ़ने लगा है। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने संबंधित अधिकारियों को बांधों और नदियों के जलस्तर पर लगातार नजर रखने तथा तटीय एवं निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को समय रहते सतर्क करने के निर्देश दिए हैं।प्रशासन के अनुसार, रिहंद बांध का एक गेट खोल दिया गया है, जबकि दूसरे गेट को खोलने की प्रक्रिया जारी है। इसके बाद ओबरा बांध के तीन गेटों को नौ फीट तक खोला गया है। बांधों से पानी छोड़े जाने और लगातार बारिश के कारण नदियों के जलस्तर तथा बहाव में और वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। इसे देखते हुए नदी तटीय क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जा रही है। संभावित बढ़े जलप्रवाह को लेकर प्रशासनिक टीमें भी सक्रिय हैं। चकाड़ी क्षेत्र में थाना प्रभारी ने स्थानीय नागरिकों के बीच पहुंचकर स्थिति की जानकारी ली और लोगों से नदी तट, निचले इलाकों तथा तेज बहाव वाले स्थानों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने कहा कि सोनभद्र की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए लगातार बारिश के दौरान पहाड़ी नालों और बरसाती जलधाराओं में अचानक पानी बढ़ सकता है। ऐसे में किसी भी उफनते नाले, नदी अथवा तेज बहाव वाले रास्ते को पार करने का प्रयास न करें। बच्चों और पशुओं को भी नदी-नालों के आसपास न जाने दें। उन्होंने कहा कि जनपदवासियों की सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और संबंधित विभागों को पूरी सतर्कता के साथ आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। साथ ही नदी-नालों एवं तेज जलप्रवाह वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी गई है। प्रशासन का कहना है कि लगातार बारिश के दौरान सतर्कता और सावधानी ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय है।
नई सर्किल रेट सूची पर 7 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे आपत्ति
15 सितंबर से लागू होगी संशोधित मूल्यांकन सूची, तहसील व उपनिबंधक कार्यालयों में निरीक्षण के लिए उपलब्ध सोनभद्र। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जनपद में नई मूल्यांकन सूची यानी सर्किल रेट तैयार करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। जिला प्रशासन ने संशोधित मूल्यांकन सूची को जनसामान्य के निरीक्षण के लिए संबंधित तहसीलदार एवं उपनिबंधक कार्यालयों में उपलब्ध करा दिया है। प्रस्तावित नई सूची को 15 सितंबर 2026 से लागू किया जाना है।जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के निर्देश पर तैयार की गई संशोधित मूल्यांकन सूची में खसरा संख्या आधारित अद्यतन आंकड़ों, भूमि की वास्तविक उपयोगिता, क्षेत्रीय परिस्थितियों और प्रचलित बाजार दरों को आधार बनाया गया है। प्रशासन का उद्देश्य संपत्तियों के मूल्यांकन को अधिक यथार्थपरक और पारदर्शी बनाना है । पूर्व में प्रकाशित प्रस्तावित मूल्यांकन सूची पर प्राप्त सुझावों एवं आपत्तियों का संबंधित अधिकारियों द्वारा परीक्षण किया गया। इसके बाद आवश्यक संशोधन करते हुए संशोधित सूची तैयार की गई है। अब आमजन, जनप्रतिनिधियों और अन्य संबंधित हितधारकों को एक बार फिर सूची का अवलोकन कर अपनी आपत्ति अथवा सुझाव देने का अवसर दिया गया है। जिला प्रशासन के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को अपने क्षेत्र की किसी संपत्ति अथवा निर्धारित मूल्य को लेकर आपत्ति या सुझाव है तो वह 7 सितंबर 2026 तक संबंधित उपनिबंधक अथवा तहसीलदार कार्यालय में लिखित रूप में प्रस्तुत कर सकता है। निर्धारित अवधि में प्राप्त आपत्तियों एवं सुझावों का नियमानुसार परीक्षण कर आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इसके बाद अंतिम मूल्यांकन सूची तैयार की जाएगी, जिसे 15 सितंबर 2026 से प्रभावी किए जाने का प्रस्ताव है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे समय रहते अपने क्षेत्र की नई मूल्यांकन सूची का अवलोकन कर लें, ताकि किसी प्रकार की आपत्ति होने पर निर्धारित समय सीमा में उसे दर्ज कराया जा सके।
अमिला माता मंदिर का होगा भव्य कायाकल्प, गांवों में रोशन होंगी गलियां
सोनभद्र। जनपद में धार्मिक स्थलों के संरक्षण-संवर्धन के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा और जनसुविधाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ी पहल की गई है। करीब पांच करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से अति प्राचीन अमिला माता मंदिर का कायाकल्प, चार गांवों में सोलर स्ट्रीट लाइट तथा तीन सरकारी विद्यालयों का सुदृढ़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। ये सभी कार्य ग्रीनको एनर्जी के सीएसआर मद से प्रस्तावित हैं।जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि क्षेत्र की आस्था से जुड़े अति प्राचीन अमिला माता मंदिर को उसकी धार्मिक महत्ता के अनुरूप सुविधायुक्त स्वरूप दिया जाएगा। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के लिए पेयजल एवं विद्युत व्यवस्था को बेहतर किया जाएगा। श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए गेस्ट रूम, आवागमन को सुगम बनाने के लिए इंटरलॉकिंग तथा धूप और बारिश से बचाव के लिए टीन शेड का निर्माण कराया जाएगा। मंदिर के मूल स्वरूप और धार्मिक गरिमा को बनाए रखते हुए सुविधाओं का विकास किया जाएगा। ग्रामीण क्षेत्रों में रात्रिकालीन आवागमन को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए बैजनाथ, पिंडारी, चकरिया और गड़वा में सोलर स्ट्रीट लाइटें स्थापित की जाएंगी। गांवों की गलियों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर सौर ऊर्जा आधारित प्रकाश व्यवस्था विकसित होने से ग्रामीणों को सुविधा मिलने के साथ पारंपरिक बिजली पर निर्भरता भी कम होगी। इसी योजना के तहत बैजनाथ, पिंडारी और चकरिया के सरकारी विद्यालयों का सुदृढ़ीकरण एवं सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। विद्यालयों की बाउंड्रीवॉल का दुरुस्तीकरण, कक्षाओं एवं परिसर को सुसज्जित करने के साथ विद्यार्थियों के लिए मध्याह्न भोजन तैयार करने हेतु अलग कक्ष बनाया जाएगा। स्वच्छ एवं सुव्यवस्थित शौचालय समेत अन्य आवश्यक सुविधाओं का भी विकास किया जाएगा। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने कहा कि विकास कार्यों का उद्देश्य ऐसी स्थायी सुविधाएं तैयार करना है, जिनका सीधा लाभ आमजन को मिले। आस्था के केंद्रों पर श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं, बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण और ग्रामीण क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। सीएसआर सहयोग से प्रस्तावित इन कार्यों के पूरा होने पर क्षेत्र में आस्था, शिक्षा और ग्रामीण आधारभूत सुविधाओं को एक साथ मजबूती मि
छात्रवृत्ति से वंचित विद्यार्थियों को मिला एक और मौका
सोनभद्र। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभिन्न कारणों से दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ पाने से वंचित विद्यार्थियों को शासन ने एक और अवसर दिया है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामान्य, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के पात्र विद्यार्थियों से संबंधित लंबित प्रकरणों के निस्तारण के लिए संशोधित समय-सारिणी जारी की गई है।जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी ने बताया कि जिन विद्यार्थियों के आवेदन शिक्षण संस्थानों से अग्रसारित नहीं हो सके अथवा पीएफएमएस से आवेदन रिजेक्ट होने सहित अन्य कारणों से छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का भुगतान नहीं हो पाया है, उनके प्रकरणों को निर्धारित प्रक्रिया के तहत निस्तारित किया जाएगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार शिक्षण संस्थानों द्वारा 1 से 7 सितंबर तक मास्टर डाटा तैयार किया जाएगा। विश्वविद्यालय अथवा एफिलिएटिंग एजेंसी द्वारा 2 से 8 सितंबर तक फीस आदि का सत्यापन तथा 3 से 10 सितंबर तक रिजल्ट अपडेट करने की कार्यवाही की जाएगी। वहीं शिक्षण संस्थान स्तर पर 16 से 18 सितंबर तक त्रुटिपूर्ण आवेदनों में आवश्यक सुधार किया जाएगा। इसके बाद सत्यापित एवं पात्र विद्यार्थियों का डाटा शिक्षण संस्थानों द्वारा 17 से 19 सितंबर तक अग्रसारित किया जाएगा। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी ने संबंधित शिक्षण संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि शासन द्वारा निर्धारित समय-सारिणी के अनुसार सभी लंबित कार्यवाही समय से पूरी की जाए, ताकि पात्र एवं वंचित विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ दिलाने की प्रक्रिया समयबद्ध ढंग से पूरी हो सके।