जेल का खुला फाटक,प्रतीकात्मक सेनानी निकल बाहर

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बलिया। बलिदान दिवस के मौके पर बुधवार की सुबह नौ बजे जेल का फाटक खुला और परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय सहित प्रतीकात्मक सेनिनियों का जत्था जेल से बाहर निकला।इस दौरान पूरा जेल परिसर भारत माता की जै तथा वन्देमातरम तथा जेल का फाटक टूटेगा,चित्तू पाण्डेय छूटेगा के गगनभेदी नारों से गूंज उठा।जेल गेट से बाहर निकलने के बाद यह जत्था कुंवर सिंह चौराहे पर वीरवर बाबू कुंवर सिंह की मूर्ति,टीडी कालेज पर पं रामदहिन ओझा की मूर्ति पर माल्यार्पण के पश्चात विभिन्न महापुरूषों तथा सेनानियों की मूर्ति पर माल्यार्पण कर श्रद्धा सुमन अर्पित किया।19 अगस्त 1942 का वह दिन जब बलिया जेल का फाटक खुला और भारत माता की जै और वन्देमातरम के गगनभेदी नारों के साथ क्रांतिकारी जेल से बाहर निकले थे।और बलिया उसी समय आजाद हो गया था।देश को आजादी मिलने के बाद प्रति वर्ष 19 अगस्त को जेल का फाटक खुलता है और प्रतीकात्मक क्रांतिकारी जेल से बाहर निकलते हैं। परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि 1942 में बलिया अपने आप को आजाद करा दिया था।कहा कि पूरे देश में तीन जनपद आजाद हुए थे।बंगाल का मेदनीपुर, महाराष्ट्र के सतारा तथा उत्तर प्रदेश का बलिया ज़िला 1942 में ही आजाद हो गया था।read more:https://pahaltoday.com/ballia-police-receive-two-modern-interceptor-bikes-sp-omvir-singh-flags-them-off/ बलिया की परम्परा है कि जेल का फाटक खुलता है और हमारे बलिया के क्रांतिकारी चित्तू पाण्डेय के नेतृत्व में जेल से बाहर निकलते हैं।और बलिया की जनता उनका स्वागत और अभिनन्दन करती है।उसी परम्परा के अनुरूप ये कार्यक्रम आज आयोजित किया गया।हम आगे भी यह कार्यक्रम हर्षोल्लास के साथ मनाते रहेंगे।डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने कहा कि 19 अगस्त 1942 को बलिया आजाद हो गया था।जिसे हम बलिया बलिया बलिदान दिवस के रूप में मनाते हैं।इसे बलिया विजय दिवस भी बोलते है।इस दिन अंग्रेजों से मुक्त होकर के चित्तू पाण्डेय जी के नेतृत्व में सरकार बनीं थीं।और उस दिन जेल के फाटक खोल दिये गये थे।और जितने भी कैदी थे,उनको मुक्त करा लिया गया था।

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