आज़मगढ़ जनपद में बिजली व्यवस्था को लेकर लोगों का आक्रोश अब विरोध प्रदर्शन में बदलता दिखाई दे रहा है। गांवों और कस्बों में लगातार ट्रांसफार्मर जलने, घंटों बिजली गुल रहने, लो वोल्टेज, जर्जर तारों, बार-बार ट्रिपिंग और अनियमित आपूर्ति से परेशान उपभोक्ताओं का सब्र टूटता जा रहा है। ताज़ा मामला बूढ़नपुर तहसील के देउरपुर बाजार का है, जहां एक महीने के भीतर 63 केवीए का ट्रांसफार्मर चार बार जलने के बाद लोगों ने रानीपुर-कोयलसा विद्युत उपकेंद्र पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया।प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना था कि हर बार वही पुराना आश्वासन मिलता है—”ट्रांसफार्मर आ रहा है”, “टीम भेजी जा रही है”, “लोड कम कर दिया जाएगा”—लेकिन कुछ दिनों बाद फिर वही ट्रांसफार्मर जल जाता है और पूरा इलाका अंधेरे में डूब जाता है। लोगों ने सवाल उठाया कि यदि ट्रांसफार्मर बार-बार जल रहा है तो उसकी वास्तविक वजह दूर क्यों नहीं की जा रही?देउरपुर के व्यापारियों का कहना है कि बिजली संकट के कारण दुकानें प्रभावित हो रही हैं, छोटे कारोबार ठप पड़ रहे हैं, पीने के पानी की समस्या पैदा हो रही है और भीषण गर्मी में बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों का जीवन कठिन हो गया है। छात्रों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
यह घटना केवल देउरपुर तक सीमित नहीं है। जनपद के विभिन्न क्षेत्रों से समय-समय पर ट्रांसफार्मर जलने, जर्जर एलटी और हाईटेंशन लाइन, झुके बिजली के पोल, लो वोल्टेज और लगातार ट्रिपिंग की शिकायतें सामने आती रही हैं।read more:https://khabarentertainment.in/staff-nurse-accuses-blood-center-operator-of-sexual-harassment-intimidation-and-mental-harassment-case-registered/ ऐसे में लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि ओवरलोडिंग की जानकारी पहले से थी तो क्षमता वृद्धि और तकनीकी सुधार समय रहते क्यों नहीं किए गए?विद्युत उपभोक्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि तय समय तक नया ट्रांसफार्मर स्थापित नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। विभागीय अधिकारियों ने अगले दिन सुबह तक ट्रांसफार्मर लगाने और अतिरिक्त लोड को दूसरे ट्रांसफार्मरों में स्थानांतरित करने का आश्वासन दिया है।
अब सबसे बड़ा सवाल बिजली विभाग के उच्च अधिकारियों और नीति-निर्माताओं से है। क्या हर बार ट्रांसफार्मर जलने के बाद नया ट्रांसफार्मर लगाना ही समाधान है, या पूरे वितरण तंत्र की तकनीकी समीक्षा और दीर्घकालिक सुधार की आवश्यकता है? क्या जर्जर लाइनों, पुराने उपकरणों और क्षमता से अधिक लोड जैसी समस्याओं को समय रहते दूर नहीं किया जा सकता?जनता का कहना है कि प्रदेश सरकार लगातार बेहतर बिजली व्यवस्था का लक्ष्य रख रही है और इस दिशा में निवेश भी किया जा रहा है। ऐसे में ज़रूरत है कि इन योजनाओं का लाभ अंतिम उपभोक्ता तक प्रभावी ढंग से पहुँचे। यदि कहीं तकनीकी कमियाँ, रखरखाव की समस्याएँ या स्थानीय स्तर पर लापरवाही है, तो उनकी समयबद्ध समीक्षा और जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।देउरपुर की घटना केवल एक ट्रांसफार्मर के जलने की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन हजारों उपभोक्ताओं की आवाज़ है जो चाहते हैं कि बिजली व्यवस्था केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि ज़मीन पर भरोसेमंद, सुरक्षित और निर्बाध रूप में दिखाई दे। जनता अब आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान चाहती है।