बड़हलगंज। शरीर में त्वचा के नीचे बनने वाली हर गांठ कैंसर नहीं होती। कई बार यह लिपोमा होती है, जो वसा (फैट) की कोशिकाओं से बनने वाली एक सामान्य और प्रायः हानिरहित गांठ है। हालांकि अधिकांश मामलों में यह गंभीर नहीं होती, फिर भी इसकी अनदेखी करना उचित नहीं है।बिदू हास्पिटल के डॉक्टर दयानन्द गुप्ता ने बताया कि लिपोमा शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन यह अधिकतर गर्दन, कंधे, पीठ, हाथ, जांघ और पेट पर पाया जाता है। यह त्वचा के नीचे मुलायम, गोल और आसानी से हिलने वाली गांठ के रूप में महसूस होती है। सामान्यतः इसमें दर्द नहीं होता, लेकिन यदि इसका आकार बढ़ जाए या यह किसी नस पर दबाव डालने लगे तो दर्द, झुनझुनी अथवा असुविधा हो सकती है।डॉ. गुप्ता के अनुसार, लिपोमा का सटीक कारण पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। हालांकि आनुवंशिक कारण, वसा कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि तथा 30 से 60 वर्ष की आयु में इसका अधिक पाया जाना प्रमुख कारण माने जाते हैं।उन्होंने सलाह दी कि यदि शरीर में कोई गांठ तेजी से बढ़ रही हो, दर्द कर रही हो, बार-बार चोट लगने से परेशानी हो रही हो या उसका स्वरूप असामान्य दिखाई दे, तो बिना देर किए योग्य सर्जन से जांच करानी चाहिए। समय पर जांच से सही बीमारी की पहचान हो जाती है और आवश्यक उपचार किया जा सकता है।read more:https://khabarentertainment.in/excise-department-raids-dhabas/डॉ. गुप्ता ने बताया कि लिपोमा का सबसे प्रभावी उपचार सर्जरी द्वारा गांठ को पूरी तरह निकालना है। यह एक सुरक्षित एवं सफल प्रक्रिया है और अधिकांश मरीज उसी दिन या अगले दिन अस्पताल से घर जा सकते हैं।उन्होंने लोगों से अपील की कि शरीर में किसी भी प्रकार की गांठ को हल्के में न लें। बिना चिकित्सकीय सलाह के घरेलू उपचार या अप्रशिक्षित व्यक्तियों से इलाज कराने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लेकर समय पर जांच एवं उपचार कराएं।