बालाघाट। गर्भवती महिलाओं और बच्चों को बंटने वाला फोर्टिफाइड चावल कथित भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। इथेनॉल बनाने वाली कंपनियां, राइस मिल और अफसरों में बीच करीब 1160 करोड़ रुपए के इस घपले का खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि करीब 5 लाख मीट्रिक टन फोर्टिफाइड चावल को इथेनॉल बनाने के बजाय खुले बाजार में बेचा गया और सरकारी गोदामों में वापस जमा कराया गया, जिससे करोड़ों का मुनाफा कमाया गया। read more:https://khabarentertainment.in/khadiya-bazar-kota-road-becomes-a-death-trap-commuters-plagued-by-potholes-and-waterlogging/इथेनॉल प्लांट संचालकों को सरकार से यह फोर्टिफाइड चावल सिर्फ 2,320 रुपए प्रति क्विंटल की रियायती दर पर मिलता था। राइस मिल प्लांट संचालक इस कीमती चावल से इथेनॉल बनाने के बजाय, इसे 2,800 प्रति क्विंटल के दाम पर वापस राइस मिलर्स को बेच देते थे। राइस मिलर्स इसी चावल को नई बोरियों में भरकर सरकार को वापस सौंप देते थे कि यह उन्होंने धान से तैयार किया है। इस खेल से मिल मालिकों को धान से चावल बनाने की मेहनत नहीं करनी पड़ी। उन्होंने सरकार से मिलिंग का चार्ज भी वसूला और जो असली धान उन्हें पीसने के लिए मिला था, उसे खुले बाजार में बेचकर भारी मुनाफा कमाया। इस फर्जीवाड़े में सरकारी नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। नियम के मुताबिक गोदामों में रखा पुराना चावल पहले इस्तेमाल होना चाहिए था, लेकिन भ्रष्ट अफसरों ने नया फोर्टिफाइड चावल आवंटित कर दिया। अफसरों और दलालों के जरिए इसकी गोपनीय जानकारी पहले ही लीक कर दी जाती थी। राइस मिलों के बिजली बिल, लेबर रिकॉर्ड और उनके काम की कोई नियमित जांच नहीं की गई। इसी लापरवाही के चलते यह करोड़ों का घोटाला लंबे समय तक चलता रहा और समाज के सबसे कमजोर वर्ग के मुंह से उनका निवाला छीन लिया गया।