अमरनाथ तिवारी अमर के आवास पर किया गया कवि-गोष्ठी का आयोजन  

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लखनऊः साहित्य चेतना समाज के तत्वावधान में ‘चेतना-प्रवाह’ कार्यक्रम के अन्तर्गत नगर के वंशीबाजार स्थित स्वामी विवेकानन्द काॅलोनी में संस्था के संस्थापक अमरनाथ तिवारी अमर के आवास पर कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी का शुभारंभ अभिमन्यु यादव की सरस्वती वंदना ‘हे स्वर की देवी माता सरस्वती मेरा उद्धार कर दो’ से हुआ।युवा कवि मनोज यादव बेफिक्र ने ‘आदमी के जीवन में बढ़ रहा तनाव देखा/हँसते हुए चेहरे के पीछे छिपा गहरा घाव देखा’ सुनाकर श्रोताओं की ढेर सारी वाहवाही लूटी।व्यंग्यकार आशुतोष श्रीवास्तव ने ‘झूठ जब गाल बजा रहा था/सच कोने में बैठ ताली बजा  रहा था’ सुनाकर वर्तमान विसंगतियों की ओर ध्यान आकृष्ट कराया।युवा शायर गोपाल गौरव ने ‘बहुत खुश है वो इस दौरे तरक्की में भी ऐ गौरव/जो दुनिया में किसी भी चीज से रिश्ता नहीं जोड़ा’ सुनाकर श्रोताओं की खूब तालियाँ बटोरी।डाॅ.शशांक शेखर पाण्डेय ने अपने सुमधुर कंठ से ‘काले मेघा ले जाना मेरा संदेश/जब जाना मेरे प्रियतम के देश’ सुनाकर श्रोताओं को आनन्दित किया।वरिष्ठ रचनाकार अमरनाथ तिवारी अमर ने ‘आगे बढ़ते उत्साही को/कब रोक सकीं दुर्गम राहें/मंजिल खुद उसे बुलाती है/ फैला करके दोनों बाहें’ सुनाकर श्रोताओं में ऊर्जा का संचार किया।वरिष्ठ गीतकार-गजलकार नागेश मिश्र ने ‘ये सच नहीं कि मुझमें कोई ऐब नहीं/लेकिन इतना सच है कि कोई फरेब नहीं’ सुनाकर गोष्ठी को ऊँचाई प्रदान की।गोष्ठी में प्रमुख रूप से सुधीर मिश्र,अरुण राय आजाद,रामेश्वर तिवारी नीरज श्रीवास्तव, राजकुमार गुप्ता,read more:https://khabarentertainment.in/excise-department-raids-dhabas/
मनोज सिंह,डॉ.सुनील शाही,दीपेन्द्र सिंह आदि उपस्थित थे।अध्यक्षता नागेश मिश्र एवं संचालन आशुतोष श्रीवास्तव ने किया।अंत में धन्यवाद ज्ञापन संस्था के संगठन सचिव प्रभाकर त्रिपाठी ने किया।

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