एक विधवा महिला पर भारी, ऑनलाइन शिकायतों के बाद भी नहीं बना अंत्योदय राशन कार्ड, विधवा महिला न्याय की आस में भटकने को मजबूर

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लखीमपुर खीरी।सरकार द्वारा गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों को खाद्यान्न सुरक्षा उपलब्ध कराने के लिए अनेक जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही के चलते पात्र लोगों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। ऐसा ही एक मामला तहसील निघासन क्षेत्र के ग्राम बनवीरपुर से सामने आया है, जहां एक विधवा महिला पिछले कई महीनों से अंत्योदय राशन कार्ड बनवाने के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रही है, लेकिन उसकी समस्या का समाधान नहीं हो सका है।प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम बनवीरपुर निवासी परवीना बेगम पत्नी स्वर्गीय शरफुद्दीन का पुराना अंत्योदय राशन कार्ड निरस्त हो जाने के बाद नया राशन कार्ड जारी किया जाना था। महिला का आरोप है कि उसने नियमानुसार आवेदन किया और ग्राम पंचायत स्तर से प्रस्ताव भी भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद उसका अंत्योदय राशन कार्ड आज तक जारी नहीं किया गया।पीड़िता ने बताया कि उसने अपनी समस्या को लेकर तहसील निघासन, जिला अधिकारी लखीमपुर खीरी तथा जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से उच्च अधिकारियों तक शिकायत दर्ज कराई। इतना ही नहीं, मामले की शिकायत लखनऊ स्तर तक ऑनलाइन माध्यम से भी भेजी गई, लेकिन हर बार शिकायत निस्तारण के नाम पर मामला वापस निघासन पहुंच गया और वहीं फाइलों में दबकर रह गया।महिला का आरोप है कि जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने के बाद पूर्ति निरीक्षक कार्यालय द्वारा निस्तारण रिपोर्ट लगाकर मामले को समाप्त दिखा दिया गया, जबकि वास्तविकता यह है कि उसका राशन कार्ड आज तक नहीं बना। पीड़िता का कहना है कि रिपोर्ट में यह दर्शाया गया कि आवश्यक कार्रवाई कर दी गई है, लेकिन जब उसने पुनः अपने आवेदन की स्थिति की जानकारी ली तो पता चला कि उसका आवेदन अभी भी संबंधित कार्यालय में लंबित पड़ा हुआ है।विधवा महिला की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय बताई जा रही है।read more:https://pahaltoday.com/the-strait-of-hormuz-will-not-be-opened-by-agreement-alone-removing-marine-mines-will-take-time/परिवार में कमाने वाला कोई सदस्य नहीं है और वह किसी तरह अपना जीवन-यापन कर रही है। ऐसे में अंत्योदय राशन कार्ड उसके लिए जीवनरेखा साबित हो सकता है, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण उसे सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।ग्रामीणों का कहना है कि सरकार गरीबों और असहाय लोगों के लिए योजनाएं बनाती है, लेकिन कई बार विभागीय स्तर पर व्याप्त लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार के कारण पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता। लोगों का आरोप है कि यदि शिकायतों के बाद भी कार्रवाई न हो और फाइलें एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय तक घूमती रहें, तो आम जनता का विश्वास प्रशासनिक व्यवस्था से उठना स्वाभाविक है।क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि एक गरीब विधवा महिला जब तहसील से लेकर जिला मुख्यालय और लखनऊ तक अपनी गुहार लगा चुकी है, तब भी उसकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। सवाल यह उठता है कि आखिर एक असहाय महिला न्याय पाने के लिए कितने दरवाजे खटखटाए? कब तक अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाती रहे? और यदि जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का भी वास्तविक निस्तारण नहीं होगा, तो फिर ऐसे मंचों का उद्देश्य क्या रह जाएगा?पीड़िता ने एक बार फिर उच्च अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कराकर उसका अंत्योदय राशन कार्ड शीघ्र जारी कराने तथा मामले में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग की है।अब देखने वाली बात यह होगी कि शासन और प्रशासन इस गरीब विधवा महिला की फरियाद पर कब तक संज्ञान लेता है, या फिर उसकी शिकायतें कागजों और पोर्टलों तक ही सीमित रह जाएंगी। मजे की बात जिम्मेदार मलाई काट रहे गरीब चक्कर काट रहे l

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