अशोक कुमार मिश्र
मलीहाबादी दशहरी व सफेदा आम के साथ अब इस गर्मी लोग खुशबू से भरपूर मोदी मैंगो का स्वाद भी ले सकेंगे। लखनऊ मलीहाबाद नबीपनाह गांव के बागवान उपेंद्र कुमार सिंह ने इस विशेष किस्म के आम को विकसित किया है। केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान से तकनीकी जानकारी लेकर कड़ी मेहनत से इस अनूठी किस्म को तैयार किया है। साल 2023 में इसे आधिकारिक तौर पर केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में ‘मोदी मैंगो’ के नाम से पंजीकृत कराया था। इस साल मोदी मैंगो की पैदावार बेहद अच्छी हुई है। इस आम की मिठास कम है, लेकिन खुशबू आकर्षित करने वाली है। इसकी खासियत यह है कि सभी आम एक आकार और सुडौल होते हैंयह आम दिखने में जितना खूबसूरत है, इसके गुण भी उतने ही लाजवाब हैं। इस प्रजाति का एक आम 400 ग्राम तक वजनी होता है। आमतौर पर आम अपनी मिठास के लिए जाने जाते हैं, लेकिन मोदी मैंगो में मिठास कम होती है। यह उन लोगों के लिए एक बेहतरीन विकल्प है, जो कम मीठा खाना पसंद करते हैं। इस नए मोदी मैंगो ने न सिर्फ आम उत्पादकों बल्कि आम के शौकीनों के बीच भी उत्सुकता पैदा कर दी है।read more:https://pahaltoday.com/man-dies-in-road-accident-in-barhalganj/मलिहाबाद के आम उत्पादक और किसान उपेन्द्र सिंह ने दो देशी आम की किस्मों के संकरण से एक नई किस्म विकसित की। इस पर वे लगभग 2019 से काम कर रहे थे। 2021 में इसे लखनऊ के आम महोत्सव में प्रदर्शित किया गया और बाद में इसका पंजीकरण कराया गया।इसका नाम “मोदी” क्यों रखा गया, इसके जवाब में उपेन्द्र सिंह कहते हैं कि आम का ऊपरी हिस्सा अपेक्षाकृत चौड़ा और उभरा हुआ है, जिससे उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रसिद्ध “56 इंच के सीने” वाले बयान की याद आई। इसी वजह से उन्होंने इसका नाम “मोदी” रखा। इसकी विशेषताएँ यह है कि इसमें गूदे की मात्रा अधिक है जबकि रेशा अपेक्षाकृत कम है। इसे दशहरी जैसी लोकप्रिय किस्मों के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है। इसका पंजीकरण करा कर संबंधित प्राधिकरण से प्रमाण पत्र भी प्राप्त हुआ है। इसके बाद “मोदी” नाम इस आम की पहचान के रूप में दर्ज हो गया।लखनऊ के मलिहाबाद को भारत के सबसे प्रसिद्ध आम क्षेत्रों में गिना जाता है। यहाँ सैकड़ों किस्मों के आम उगाए जाते हैं, जिनमें सबसे प्रसिद्ध दशहरी आम है। माना जाता है कि दशहरी का मूल “मदर ट्री” आज भी इस क्षेत्र में मौजूद है और लगभग 200 वर्ष पुराना है। अपनी विशिष्ट मिठास, गाढ़ी सुगंध और मुलायम गूदे के कारण दशहरी को देश ही नहीं, विदेशों में भी विशेष पहचान मिली हुई है। दशहरी आम का मूल स्थान दशहरी गाँव माना जाता है। कहा जाता है कि इसी क्षेत्र से इस किस्म की शुरुआत हुई और बाद में यह पूरे उत्तर भारत में लोकप्रिय हो गई। आज मलिहाबाद को दशहरी आम की राजधानी के रूप में जाना जाता है। दशहरी आम की सबसे बड़ी विशेषता इसका रेशारहित, मुलायम और रसदार गूदा है। इसका स्वाद अत्यंत मीठा होता है और इसमें प्राकृतिक सुगंध लंबे समय तक बनी रहती है। इसका छिलका पतला और रंग हल्का पीला होता है, जबकि गुठली अपेक्षाकृत छोटी होती है, जिससे खाने योग्य भाग अधिक मिलता है। दशहरी आम में शर्करा की मात्रा संतुलित होने के कारण इसका स्वाद अन्य कई किस्मों से अलग और अधिक आकर्षक माना जाता है। यही वजह है कि घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात बाजार में भी इसकी मांग बनी रहती है।इसी मलिहाबाद से मोदीमैंगो का उदय हुआ है। इससे पहले भी मशहूर आम विशेषज्ञ हाजी कलीमुल्लाह खान ने नमो नाम की एक किस्म विकसित की थी। वे एक ही पेड़ पर सैकड़ों किस्मों के आम उगाने के लिए प्रसिद्ध हैं। नमो आम भी अपने आप में खास है। पद्मश्री सम्मान से सम्मानित कलीमुल्लाह खान अपनी अनोखी ग्राफ्टिंग तकनीक के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने अपने मलिहाबाद स्थित बाग में एक ही पेड़ पर सैकड़ों किस्मों के आम उगाकर नई पहचान बनाई है। आम की राजधानी कहे जाने वाले मलिहाबाद के प्रसिद्ध बागवानी विशेषज्ञ और ‘मैंगो मैन’ के नाम से मशहूर हाजी कलीमुल्लाह द्वारा विकसित की गई ‘नमो आम’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के सम्मान में रखा था। ‘नमो आम’ को विकसित करते समय कलीमुल्लाह खान ने इसकी गुणवत्ता, स्वाद और आकर्षक स्वरूप पर विशेष ध्यान दिया। उनका था कि जिस तरह नरेंद्र मोदी जी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना चुके हैं, उसी तरह यह आम भी अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करेगा।
कलीमुल्लाह खान का मानना है कि नई किस्मों को प्रसिद्ध व्यक्तियों के नाम देने से लोगों में उनके प्रति रुचि बढ़ती है और भारतीय आमों को वैश्विक पहचान मिलती है। उनके इस नवाचार ने मलिहाबाद के आम उद्योग को नई दिशा देने का काम किया है। कलीमुल्लाह खान की उपलब्धियां भारतीय बागवानी के क्षेत्र में नवाचार और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण हैं। ‘नमो आम’ उनकी इसी रचनात्मक सोच और प्रयोगधर्मिता का प्रतीक माना जाता है।