सोनभद्र। सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का गुरूवार को समापन हो गया। अंतिम दिन प्रातः वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हवन-पूजन एवं पूर्णाहुति कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य यजमान सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता निभाई। इसके उपरांत विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जहां श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।read more:https://pahaltoday.com/shivoham-seva-sansthan-organized-a-huge-feast/कथा के सप्तम दिवस पर वृन्दावन से पधारे बाल व्यास मानस जी महाराज ने भक्ति, प्रेम और वियोग के आध्यात्मिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रेम के बाद वियोग और वियोग के बाद ही भगवान की वास्तविक प्राप्ति संभव होती है। जब साधक का अहंकार समाप्त हो जाता है, तब उसे प्रत्येक कण में परमात्मा का दर्शन होने लगता है। उन्होंने संत कबीर की वाणी जब मैं था हरि नहीं, अब हरि है मैं नाय का उल्लेख करते हुए कहा कि जब मनुष्य के भीतर से कपट, छल, निंदा और अहंकार समाप्त हो जाते हैं, तभी ईश्वर की कृपा का अनुभव संभव होता है। भगवान न ऊंच-नीच देखते हैं और न ही धन-दौलत, वे केवल सच्चे प्रेम और भक्त की करुण पुकार को स्वीकार करते हैं। कथा के दौरान व्यास जी ने विदुर, शबरी, ध्रुव, प्रह्लाद और सुदामा जैसे प्रसंगों का उल्लेख करते हुए भगवान और भक्त के दिव्य संबंध को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। कथा समापन पर श्रद्धालुओं ने व्यासपीठ का पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। विदाई के समय अनेक श्रद्धालु भावुक होकर नम आंखों से आशीर्वाद लेते दिखाई दिए। पूरा वातावरण भक्तिमय भजनों और जयकारों से गूंज उठा। कार्यक्रम में काले कंबल वाले बाबा तथा महामंडलेश्वर किरण गिरी की गरिमामयी उपस्थिति रही। आयोजन समिति के अध्यक्ष निरंजन जायसवाल ने सभी श्रद्धालुओं, सहयोगियों और आयोजन से जुड़े लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर नगर पंचायत अध्यक्ष कमलेश मोहन, संदीप तिवारी, राजेश्वर श्रीवास्तव, ओमकार अग्रहरि, कृष्ण कुमार, भोला नाथ, रमाशंकर, बृजेश कुमार, राकेश गुप्ता, राकेश कुमार बड़का सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।