जनपद लखीमपुर खीरी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां एक ओर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और स्कूलों को ‘स्मार्ट’ बनाने के लिए दिन-रात प्रयासरत हैं,वहीं दूसरी ओर कुछ गैर-जिम्मेदार कस्टोडियन सरकार की इन कोशिशों पर पानी फेरने में लगे हैं। ऐसा ही एक शर्मनाक और हैरान कर देने वाला मामला लखीमपुर खीरी जिले के ब्लॉक मोहम्मदी से सामने आया है, जिसने शिक्षा के मंदिर को कलंकित कर दिया है मामला मोहम्मदी ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत ग्रंट साहबगंज के मजरा दिस्तापुर गांव का है। आरोप है कि यहां स्थित प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक (हेडमास्टर) ने नियमों को ताक पर रखकर विद्यालय की चाबियां ग्रामीणों को सौंप दीं। इसके बाद विद्यालय प्रांगण का इस्तेमाल किसी शैक्षणिक या सामाजिक सुधार के कार्य के लिए नहीं, बल्कि अश्लीलता परोसने के लिए किया गया।read more:https://pahaltoday.com/pump-operator-accused-of-assault-victim-files-complaint-at-police-station/
रात्रि के समय स्कूल परिसर के भीतर बाकायदा एक बड़ा पंडाल सजाया गया और लाउडस्पीकर लगाए गए। इसके बाद जो कुछ भी हुआ, उसने पूरे शिक्षा विभाग और सभ्य समाज को शर्मसार कर दिया। मिली जानकारी के अनुसार, रात भर स्कूल प्रांगण में अश्लील गानों पर बारबालाओं के डांस का कार्यक्रम चला। स्टेज पर बारबालाओं ने जमकर ठुमके लगाए और वहां मौजूद ग्रामीण व युवक अश्लीलता की सारी हदें पार करते नजर आए। बड़ा सवाल यह है कि जो परिसर बच्चों के भविष्य को संवारने और उन्हें नैतिक शिक्षा देने के लिए बनाया गया है, वहां रात के अंधेरे में इस तरह का फूहड़पन और अश्लीलता परोसी जाना बेहद चिंताजनक है इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का साफ तौर पर कहना है कि जब विद्यालय के प्रधानाध्यापक खुद इस तरह के अनैतिक कार्यों के लिए स्कूल की चाबी सौंप रहे हैं, तो वह बच्चों को क्या खाक शिक्षा देंगे? ऐसे माहौल में बच्चों के भविष्य और उनकी मानसिकता पर क्या असर पड़ेगा क्षेत्र की जनता ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लिया है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे तौर पर गुहार लगाई है और मांग की गयी है कि
दोषी प्रधानाध्यापक को तुरंत निलंबित किया जाए।सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग करने और शिक्षा के मंदिर की गरिमा को ठेस पहुंचाने के आरोप में आयोजकों और प्रधानाध्यापक पर सख्त कानूनी कार्रवाई (FIR) दर्ज हो। शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि भविष्य में कोई भी ऐसी हिमाकत न कर सके। यह घटना केवल एक स्कूल की लापरवाही नहीं है, बल्कि यह दर्शाती है कि जमीनी स्तर पर कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग अपने कर्तव्यों के प्रति कितने लापरवाह हो चुके हैं। ‘सख्त मिजाज’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज में जहां अपराधियों और मर्यादा तोड़ने वालों पर तुरंत ‘बुलडोजर एक्शन’ या सख्त कार्रवाई होती है, ऐसे में देखना यह होगा कि इस मामले में प्रशासन कितनी तत्परता से एक्शन लेता है।