आँपरेशन स्माइलिंग बुद्धा की दी गयी जानकारी

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फतेहपुर। राज्य उ० प्र० के जनपद फतेहपुर अन्तर्गत नि० अधिवक्ता “हुमा परवीन” ने बताया कि ”भारत का पहला सफल परमाणु परीक्षण 18 मई,1974 ई० को क्षमता लगभग 8 से 12 किलोटन टीएनटी (TNT) इसके साथ ही भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 5 स्थायी सदस्यों के बाहर परमाणु परीक्षण करने वाला दुनिया का छठा देश बन गया था।” हालांकि दुनियाभर के कई देशों ने भारत के साथ कई व्यापारिक व अन्य चीजों पर प्रतिबंध लगा दिया था। इस प्रतिबंध को थोपने के पीछे उनका कहना था कि इससे परमाणु प्रसार को बढ़ावा मिलेगा। यह ऐतिहासिक परीक्षण ‘राजस्थान के थार रेगिस्तान में स्थित पोखरण परीक्षण रेंज में किया गया था।’ इस मिशन को आधिकारिक तौर पर “स्माइलिंग बुद्धा” कोड नाम “बुद्ध पूर्णिमा” के दिन किए जाने और शांतिपूर्ण संदेश देने के कारण इसे यह कोडनेम दिया गया था ।भगवान बुद्ध शांति के प्रतीक हैं और भारत दुनिया को यह संदेश देना चाहता था कि यह परमाणु विस्फोट शांतिपूर्ण उद्देश्यों और अनुसंधान के लिए हैं। इस उपलब्धि के साथ ”भारत” संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पाँच स्थायी सदस्यों के बाहर परमाणु परीक्षण करने वाला पहला देश बन गया था। जिसने भारत को वैश्विक परमाणु क्लब में शामिल किया था। ‘प्रमुख वैज्ञानिक और नेतृत्व इस अत्यंत गुप्त अभियान का’ “वैज्ञानिक डॉ. राजा रामन्ना” ने किया था। इसे “भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया था।read more:https://pahaltoday.com/nhm-contract-workers-started-symbolic-protest-by-tying-black-ribbons/” उस समय देश की “प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी” थीं। जिनके निर्देश पर यह मिशन पूरा किया गया था। भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संसद में दिए एक भाषण में कहा था कि भारत सक्षम होने के बाद भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। लेकिन लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी के विचार इसके इतर थे। भारत के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में परमाणु कार्यक्रम के शांतिपूर्ण उपयोग पर जोर दिया गया। वही इंदिरा गांधी के सत्ता में आने के बाद परमाणु कार्यक्रम को तेजी मिली और 75 वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की टीम ने इस परीक्षण को सफल बना दिया। इस टीम में राजा रमन्ना थे जो इस प्रोग्राम की अगुवाई कर रहे थे। वहीं पीके अयंगार, राजगोपाल, चिदंबरम और अन्य वैज्ञानिक भी इस टीम में शामिल थे। बता दें कि इन्होंने 1967 से 1974 तक काम किया था। इसी का नतीजा था कि परमाणु परीक्षण सफलतापूर्वक किया जा सका और बिना दुनिया के किसी देश को पता लगे।

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