गो सेवा आयोग के उपाध्यक्ष अतुल सिंह एवं सदस्य राजेश सिंह सेंगर ने जिले में संचालित गो आश्रय स्थलों टण्डवा महन्थ, अन्धरपुरवा विकास खण्ड-इकौना एवं खजुहा झुनझुनिया, विकास खण्ड-हरिहरपुररानी का निरीक्षण किया गया। निरीक्षणोपरान्त उपाध्यक्ष द्वारा जिला स्तरीय अनुश्रवण, मूल्यांकन एवं समीक्षा की बैठक कलेक्ट्रेट सभागार भिनगा में की गई। जिसमें समिति के सदस्यों सहित सीडीओ शाहिद अहमद, डीएफओ धनराज मीणा, एएसपी, समस्त एसडीएम, बीडीओ, पशुचिकित्साधिकारी एवं समस्त सम्बन्धित सचिव ग्राम पंचायत उपस्थित रहे। बैठक में गो आश्रय स्थल के संचालन सम्बन्धी आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये एवं सम्बन्धित को अनुपालन सुनिश्चित करने हेतु निर्देशित किया गया। उन्होंने समस्त गो आश्रय स्थलों पर साफ सफाई, स्वच्छता बरतने के निर्देश दिए। रबी की फसलों की कटाई लगभग खत्म हो चुकी है। इस समय स्थानीय स्तर पर किसानों के पास भूसा पर्याप्त मात्रा में कम दरों पर उपलब्ध रहता है। इसलिए गो आश्रय स्थलों मे संरक्षित गोवंश के लिए वर्षभर के लिए भरण-पोषण हेतु भूसा संग्रह कर लिया जाय। जिस गो आश्रय स्थल पर हरा चारा उपलब्ध नहीं है, वहां साइलेज खिलाया जाय तथा समय से हरा चारा, भूसा चरही में डालने के निर्देश दिए गये। हरा चारा क्रय हेतु हरा चारा उत्पादक किसानों से अनुबन्ध कर लिया जाय तथा हरा चारा इनसे क्रय किया जाय। छोटे तथा बड़े गोवंश को अलग-अलग रखने की व्यवस्था की जाय, जिससे सभी गोवंश को पर्याप्त चारा मिल सके। जनपद के लो-लैण्ड वाले गोशालाओं में आवश्यकतानुसार मिट्टी डालकर उंचा किया जाय। जिससे जल जमाव आदि की समस्या उत्पन्न न होने पाये। गो आश्रय स्थलों मे गो संवर्धन पर विशेष ध्यान दिये जाने की आवश्यकता है। संबंधित पशु चिकित्साधिकारी द्वारा गो आश्रय स्थलों के स्वस्थ मादा गोवंश को पृथक कर सेक्स्ड सार्टेड सीमेन द्वारा कृत्रिम गर्भाधान से गाभिन करा कर गो संवर्धन कराया जाय। गो आश्रय स्थलों में दुधारू गोवंशों की संख्या बढाये जाने पर बल दिया जाए। गोवंश को पीने हेतु पानी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाय तथा पानी की चरही की नियमित साफ-सफाई की जाय। साथ ही यह भी निर्देशित किया गया कि चरही की ऊंचाई ऐसी हो कि बड़े पशुओं के साथ-साथ छोटे पशुओं को पानी पीने में किसी प्रकार की समस्या न हो।read more:https://pahaltoday.com/bike-rider-dies-in-road-accident/
जिले में उपलब्ध अधिक से अधिक गोचर भूमि को गो आश्रय स्थलों से सम्बद्ध कराया जाय तथा उनमे हरे चारे की बुवाई की जाय। जिससे गोवंश को वर्ष भर पर्याप्त मात्रा में हरा चारा मिलता रहे। कृषकों को जैविक खेती/ प्राकृतिक खेती करने हेतु प्रोत्साहित किया जाए, जिससे खाद्य सामग्रियों में होने वाले रासायनिक खाद के प्रयोग को रोक कर जहर मुक्त अनाज, फल एवं सब्जियों का उत्पादन किया जा सके। स्थानीय स्तर पर खेतों में रासायनिक खाद के बदले कम्पोस्ट / जैविक खाद के उपयोग हेतु जागरूकता फैलाया जाय। गो आश्रय स्थलों को स्वावलम्बी बनाने के लिए नवचार किया जाए। गोशाला में उपलब्ध गोबर तथा गो मूत्र से उपयोगी वस्तुओं यथा, गोबर के गमले, दिया आदि का उत्पादन कराया जाये। जनपद के नर्सरियों मे गोबर से बने गमलों के इस्तेमाल से जहां एक ओर गोबर का सदुपयोग होगा, वहीं दूसरी तरफ पालीथिन के उपयोग मे व्यापक रूप से कमी आयेगी। गोशाला में उपलब्ध गोबर को स्थानीय पशुपालकों को देकर उसके बदले भूसा प्राप्त किया जाय। जनपद के कुछ गो आश्रय स्थलों में मॉडल गोशाला के रूप में विकसित किया जाय। प्रत्येक गो आश्रय स्थल में बीमार तथा अशक्त गोवंश को पृथक रखने के लिए सिकवार्ड बनाये जायें तथा उनकी विशेष देखभाल की जाय। सिकवार्ड को चारों तरफ से ढक कर बीमार एवं अशक्त गोवंशों को पक्षियों आदि से बचाव सुनिश्चित किया जाय। सभी गो आश्रय स्थलों में गर्मी से बचाव की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाय, शेड के चारों तरफ टाट, बोरे लगाकर उन पर पानी का छिड़काव किया जाय। शेड के ऊपर पुआल बिछाया जाय, जिससे शेड को ठण्डा रखा जा सके। समस्त अस्थाई / स्थाई गो आश्रय स्थलों मे छायादार वृक्षों का रोपण अवश्य कराया जाय, जिससे गोवंश को गर्मी के मौसम में आवश्यक छाया मिल सके।राज्य सरकार द्वारा गो आश्रय स्थलों को दिये जाने वाले धनराशि का पूरी ईमानदारी के साथ सदुपयोग किया जाय। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित अधिकारी गोशालाओं का नियमित रूप से निरीक्षण कर समस्त आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करायें। गाय का दूध अमृत के सामान है। स्वदेशी नस्ल की दुधारू गायों का सवंर्धन किया जाय। इस क्रम में सभी लोगो के द्वारा सकारात्मक सोच एवं पूरी तन्मयता के साथ गो संवर्धन का कार्य किया जाय।
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