लखनऊ: वर्षा ऋतु आने वाली है। यदि हर व्यक्ति, एमएलए (आमदार), सरपंच, ग्रामपंचायत, और आम जनता 2-2 वृक्षारोपण करे और वर्षा जल संचय करे, तो यही पानी वर्षभर हमारे खेतों, पेड़ों और आने वाली पीढ़ियों के काम आएगा और उनको छाया मिलेगी।read more:https://pahaltoday.com/consumers-are-not-getting-gas-cylinders-for-the-last-45-days/डॉ श्रीवास्तव, पिछले 45 वर्षों से लोगों को स्वस्थ बनाने के साथ-साथ वर्षा जल संचय एवं जल संरक्षण का कार्य कर रहे है। उनका कहना है कि यह केवल सेवा नहीं, बल्कि देशहित और हमारा नैतिक कर्तव्य है। वर्षा जल संचय जल संरक्षण का सबसे सरल, सस्ता और देशहित का कार्य है। इससे भूजल स्तर बढ़ता है, खेती को पानी मिलता है और पानी की कमी से बचाव होता है। पानी संग्रह करने की व्यवस्था, छत से पानी संग्रह, घर, स्कूल, पंचायत भवन, अस्पताल या गोदाम की छत का उपयोग वर्षा जल संग्रह के लिए करें। छत साफ रखें। पाइप और नाली व्यवस्था, छत से आने वाले पानी को पाइप द्वारा टैंक, कुएँ या भूमिगत जल संरचना तक पहुँचाएँ। पानी जमा करने हेतु प्लास्टिक टैंक, सीमेंट टैंक, भूमिगत टैंक या खेत तालाब बनाएं।पानी को साफ रखने की व्यवस्था।फर्स्ट फ्लश सिस्टम। बारिश का पहला गंदा पानी अलग निकाल दें ताकि साफ पानी संग्रहित हो, जाली और फिल्टर, पत्ते, मिट्टी और कचरा रोकने के लिए जाली और फिल्टर लगाएँ। सिंचाई में उपयोग, ड्रिप सिंचाई अपनाएँ, कम पानी में अधिक सिंचाई के लिए ड्रिप इरिगेशन सबसे उत्तम है। टैंक के पानी को खेतों तक पहुँचाने के लिए छोटी मोटर या गुरुत्वाकर्षण प्रणाली का उपयोग करें। टैंक को ढककर रखें ताकि मच्छर न पनपें। अतिरिक्त पानी निकालने हेतु ओवरफ्लो पाइप लगाएँ। वर्ष में कम से कम एक बार टैंक और पाइप की सफाई करें। अपने परिवार जनों के जन्मदिन पर 2-2 वृक्षारोपण अवश्य कीजिए। वरिष्ठ वैद्य आयुष विभाग़ भारत सरकार एवं समाज सेवक डॉ श्रीवास्तव, पिछले 45 वर्षों से लोगों को स्वस्थ बनाने के साथ-साथ वृक्षारोपणऔर वर्षा जल संचय एवं जल संरक्षण का कार्य भी कर रहे है। वह कहते हैं कि यह केवल सेवा नहीं, बल्कि देशहित और हमारा नैतिक कर्तव्य है।