मिशन दक्षिण: अब तमिलनाडु फतह करेगी भाजपा

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नई दिल्ली। अरब सागर के तट से वर्ष 1980 में शुरू हुई भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक यात्रा 46 साल के लंबे सफर के बाद अब गंगासागर तक पहुंच गई है। पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के दुर्ग फतह करने के बाद अब पार्टी की नजरें हिंद महासागर की सीमा से लगे उन राज्यों पर हैं, जो अब भी उसके राजनीतिक प्रभाव से दूर हैं। भाजपा ने अगले एक दशक के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसके तहत भारत की समस्त समुद्री सीमाओं वाले राज्यों में पार्टी को सत्ता के शिखर तक पहुंचाना है। इस रणनीति के केंद्र में अब मिशन दक्षिण है, जिसे नई और बदली हुई ऊर्जा के साथ लागू किया जाएगा। पार्टी के रणनीतिकारों के अनुसार, दक्षिण भारत में तेलंगाना भाजपा का पहला और सबसे प्रमुख लक्ष्य है। तेलंगाना में पार्टी की जमीन काफी हद तक तैयार हो चुकी है और उसे उम्मीद है कि वह वहां जल्द ही मुख्य सत्ताधारी दल के रूप में उभरेगी। इसके बाद केरल और तमिलनाडु जैसे चुनौतीपूर्ण राज्यों के लिए विशेष व्यूह रचना पर काम शुरू होगा। कर्नाटक में भाजपा को पूरा भरोसा है कि वह अगले ही विधानसभा चुनाव में सत्ता में वापसी करेगी।read more:https://pahaltoday.com/the-dilapidated-roads-of-nanpara-have-become-a-problem-the-vip-road-is-also-in-a-dilapidated-condition/ उल्लेखनीय है कि 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद जब अमित शाह ने संगठन की कमान संभाली थी, तभी उन्होंने पूर्वोत्तर और कोरोमंडल क्षेत्र में विस्तार का रोडमैप पेश किया था। पूर्वोत्तर से कांग्रेस का सफाया करने और बिहार, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के बाद अब दक्षिण के अभेद्य किलों को भेदने की तैयारी है। तमिलनाडु में पार्टी ने पश्चिम बंगाल वाला फॉर्मूला अपनाने का संकेत दिया है। वहां अन्नाद्रमुक जैसे क्षेत्रीय दलों के कद्दावर नेताओं को अपने पाले में लाकर संगठन को मजबूत किया जा रहा है। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष नागेंद्रन का अन्नाद्रमुक से आना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। वहीं केरल में भाजपा ने इस बार के चुनावों में तीन सीटें जीतकर और पांच पर दूसरे स्थान पर रहकर अपने भावी अभियानों की सफल शुरुआत कर दी है। केरल में भाजपा की रणनीति वामपंथी दलों के घटते जनाधार को अपने पाले में करने की है। पार्टी ईसाई समुदाय के बीच भी अपनी पकड़ मजबूत कर रही है, ताकि वहां एक नया सामाजिक समीकरण तैयार किया जा सके। भाजपा का यह विस्तार अभियान भारतीय राजनीति की दिशा बदलने वाला साबित हो सकता है।

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