कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चुनाव से ठीक पहले एसआईआर हुआ था।तब एसआईआर को लेकर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी टीएमसी ने काफी आपत्तियां जाहिर की थीं। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा और लंबी सुनवाई चली। अब जब चुनाव नतीजे आए हैं, तब टीएमसी के कुछ समर्थकों और नेताओं का कहना है कि एसआईआर और ईवीएम के चलते भाजपा को यह जीत मिली है। ममता बनर्जी ने सीएम के पद से ही यह कहकर इस्तीफा देने से यह कहकर इंकार किया कि जनता ने हमें हराया नहीं है बल्कि जनादेश की लूट हुई है। इस बीच जब चुनाव के नतीजों पर नजर डालते हैं, तब आंकड़े दावों से उलट निकलते हैं। बंगाल की 49 ऐसी सीटें हैं, जहां उम्मीदवारों की जीत या हार का अंतर एसआईआर में डिलीट किए मतदाताओं की संख्या से कम है। इसे आधार बनाकर एसआईआर पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लेकिन जब पूरे डेटा का अध्ययन करते हैं, तब कुछ और ही सामने आता है। असल में ऐसी 26 सीटों पर भाजपा जीती है, जहां डिलीट हुए मतदाताओं की संख्या जीत के मार्जिन से कम है। वहीं 21 सीटों पर टीएमसी को भी जीत मिली है। इसी तरह कांग्रेस जिन दो सीटों पर जीती है, वहां की भी यही स्थिति है। इसलिए यह कहना शायद ठीक नहीं होगा कि एसआईआर का फायदा सीधे तौर पर भाजपा को मिला है। दोनों की सीट संख्या में बड़ा अंतर है। इसतरह यदि दोनों की कुल सीटों और फिर उसमें एसआईआर में डिलीट हुए नामों वाली सीट का औसत देखने पर टीएमसी ही फायदे में लगती है।read more:https://pahaltoday.com/a-grade-artist-of-all-india-radio-ranjana-mishra-taught-pachara-song-in-the-workshop/ भाजपा को कुल 207 सीटें मिली हैं और इसमें से करीब 13 फीसदी सीटें ऐसी हैं, जहां एसआईआर में इतने वोट कट गए कि जीत का मार्जिन भी उससे कम है। वहीं टीएमसी के खाते में कुल 21 सीटें गईं और यह उसकी जीती सीटों के 25 फीसदी के बराबर है। इस तरह यह समझना होगा कि भले ही कुछ सीटों पर एसआईआर में डिलीट हुए नामों का असर चुनाव पर पड़ा है, लेकिन बड़े पैमाने पर बंगाल में ऐंटी इनकम्बैंसी थी। इसका भी असर चुनाव में सीधे तौर पर देखने को मिला है। ऐंटी-इनकम्बैंसी वाली बात इसलिए भी सही लगती है क्योंकि मुस्लिमों के बड़े हिस्से का वोट पाने वाली टीएमसी को इस बार झटका लगा है। भले ही मुस्लिम बहुल ज्यादातर सीटें टीएमसी ही जीती है, लेकिन यह वोट बंटा भी है। इसकारण कांग्रेस के दोनों जीतने वाले कैंडिडेट मुस्लिम ही हैं। इसके अलावा जिस एकमात्र सीट पर लेफ्ट को जीत मिली है, वहां भी मुस्लिम कैंडिडेट ही विधानसभा पहुंचा है। इसके अलावा मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिलों से भाजपा ने 14 विधानसभा सीटें हासिल कर ली हैं।