बिजनौर। जनपद में प्रस्तावित गंगा एक्सप्रेसवे के रूट को लेकर किसानों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में किसानों और जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी बिजनौर को सौंपा, जिसमें एक्सप्रेसवे के रूट में बदलाव की मांग की गई है।ज्ञापन में कहा गया है कि गंगा एक्सप्रेसवे का सर्वे वर्तमान में तहसील बिजनौर के कई गांवों पेदा, मिर्जापुर पूरन, मौजपुर नौआबाद, इस्माइलपुर की नंगली, चौकपुरी, नसीरी, कच्छपुरा, नयागांव, अलीपुर माखन, गजरौला अचपल आदि से होकर किया जा रहा है। इन क्षेत्रों से पहले ही मेरठ-पौड़ी राजमार्ग, बिजनौर-नगीना बाईपास और अन्य प्रमुख मार्ग गुजर रहे हैं, जिससे किसानों की काफी भूमि पहले ही अधिग्रहित हो चुकी है।किसानों का कहना है कि प्रस्तावित रूट से उनकी उपजाऊ और महंगी कृषि भूमि प्रभावित होगी, जिससे सीमांत किसानों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने आशंका जताई कि यदि यही रूट लागू किया गया, तो हजारों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि नष्ट हो जाएगी और बड़ी संख्या में किसान भूमिहीन हो सकते हैं।ज्ञापन में सुझाव दिया गया है कि गंगा एक्सप्रेसवे को गंगा नदी के समीप से निकाला जाए, जहां पहले से ही सैकड़ों हेक्टेयर सरकारी एवं बंजर भूमि उपलब्ध है। प्रस्तावित वैकल्पिक रूट दारानगर गंज, जहानाबाद, बालावाली, नांगल सोती होते हुए हरिद्वार तक जोड़ने की बात कही गई है।किसानों का तर्क है कि इससे एक ओर जहां उपजाऊ कृषि भूमि का संरक्षण होगा, वहीं सरकार को भूमि अधिग्रहण में भी कम लागत आएगी। साथ ही, गंगा क्षेत्र में हर वर्ष आने वाली बाढ़ से प्रभावित किसानों को भी राहत मिल सकेगी।किसानों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि गंगा एक्सप्रेसवे का पुनः सर्वे गंगा नदी के किनारे से कराने के आदेश दिए जाएं।ज्ञापन सौंपने वालों में विभिन्न ग्राम पंचायतों के प्रधान और किसान प्रतिनिधि शामिल रहे, जिन्होंने एकजुट होकर अपनी मांग प्रशासन तक पहुंचाई।