ललितपुर। पूर्व वरिष्ठ पार्षद वरिष्ठ प्रबंधक पंकज जैन ने अवगत कराया की सिद्धक्षेत्र श्री सम्मेदशिखर जी की पावन धरा पर 18 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक क्षण साकार होने जा रहा है, जब पूज्य मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज अपने शिष्यों को जैनेश्वरी दीक्षा प्रदान करेंगे। इस भव्य आयोजन में ललितपुर सहित देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।पार्श्वनाथ दिगंबर जैन अभिनंदनोदय अतिशय तीर्थक्षेत्र क्षेत्रपाल मंदिर ललितपुर के वरिष्ठ प्रबंधक एवं पूर्व वरिष्ठ पार्षद पंकज जैन मोदी ने कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आत्मजागरण और वैराग्य का अद्भुत संगम होगा। उन्होंने बताया कि 15 अप्रैल को मुनि श्री अपने शिष्यों सहित सम्मेदशिखर जी में मंगल प्रवेश करेंगे, जिसके बाद 18 अप्रैल को दीक्षा का भव्य आयोजन होगा।उन्होंने बताया कि यह अवसर वर्ष 1968 के उस स्वर्णिम इतिहास की याद दिलाएगा, जब मुनि ज्ञानसागर महाराज ने एक महान संत को दीक्षा देकर संयम की परंपरा को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मुनि श्री प्रमाणसागर महाराज आज धर्म, समाज और राष्ट्रहित में निरंतर कार्य कर रहे हैं।उन्होंने आगे बताया कि मुनिश्री प्रमाणसागर महाराज का जन्म हजारीबाग में सेठी परिवार में नवीन कुमार के रूप में हुआ था। छत्तीसगढ़ के दुर्ग में बाल्यकाल व्यतीत करते हुए वे आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के व्यक्तित्व से प्रभावित हुए और मात्र 18 वर्ष की आयु में ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर लिया। वर्ष 1988 में सिद्धक्षेत्र सोनागिर में उन्होंने जैनेश्वरी दीक्षा लेकर संयम मार्ग को अपनाया।दीक्षा के पश्चात उन्होंने मध्यप्रदेश को अपनी कर्मस्थली बनाकर भगवान महावीर के अहिंसा, करुणा और आत्मशुद्धि के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया। वर्ष 2005 में सम्मेदशिखर जी की तलहटी में गुणायतन एवं सेवायतन की स्थापना कर धर्म को आधुनिक तकनीक से जोड़ने का अभिनव कार्य किया। उनके मार्गदर्शन में लगभग 200 दयोदय गौशालाएं संचालित हो रही हैं तथा भोपाल में स्थापित विद्याप्रमाण गुरुकुलम में कक्षा 6 से लेकर सीए स्तर तक करीब 300 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं।
मुनि श्री के ‘शंका समाधान’ कार्यक्रम देश-विदेश में अत्यंत लोकप्रिय हैं, जिन्हें पारस चैनल, जिनवाणी चैनल, प्रामाणिक ऐप और आदिनाथ चैनल के माध्यम से करोड़ों लोग देखते हैं और उनसे प्रेरणा प्राप्त करते हैं। वर्ष 1996 में उन्होंने ‘दिन की शादी, दिन का भोज’ जैसे सामाजिक संदेश देकर समाज में सादगी और संयम को बढ़ावा दिया, जो आज भी व्यापक रूप से प्रचलित है। गुणायतन-सेवायतन परिवार ने देशभर के श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनें और सम्मेदशिखर जी की पावन धरा पर पहुंचकर संयम, त्याग और आत्मकल्याण का संदेश ग्रहण करें। यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मा के जागरण का महापर्व होगा, जहां भक्ति, वैराग्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्वितीय संगम देखने को मिलेगा।