सचिदानंद जोशी की कहानी पर बनी फिल्म इफ़्तार

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नई दिल्ली, 20 मार्च। इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर नई दिल्ली के सभागार में शॉर्ट फिल्म ‘इफ्तार’ का प्रीमियर स्क्रीनिंग एवं राष्ट्रीय लोकार्पण गरिमामय वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह आयोजन विविध धर्मों के बीच संवाद, करुणा और साझा मानवीय मूल्यों को रेखांकित करने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक अवसर रहा।प्रख्यात फिल्मकार अरिंदम सिल द्वारा निर्देशित इस लघु फिल्म की कहानी वरिष्ठ लेखक और इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय राष्ट्रीय कला केन्द्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने लिखी है, जबकि इसका निर्माण सतनाम सिंह अहलूवालिया ने किया है। ‘इफ्तार’ अपने संवेदनशील कथानक और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से समाज में व्याप्त विविधताओं के बीच एकता, सह-अस्तित्व और पारस्परिक सम्मान के भाव को उभारती है। स्क्रीनिंग के बाद, फिल्म और उसके संदेश पर एक संक्षिप्त सर्चा सत्र का भी आयोजन किया गया। दूरदर्शन ने भी इस फिल्म का प्रसारण किया। यह फिल्म प्रसार भारती के ‘वेव्स’ ओटीटी पर भी देखी जा सकती है।कार्यक्रम में ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के मुख्य इमाम उमर अहमद इलियासी, दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमिटि के मुख्य सलाहकार परमजीत सिंह चंडोक, श्री लोकेश मुनि, श्री सुशील महाराज सहित विभिन्न धर्मों के 12 धर्मगुरु, कला, साहित्य, सिनेमा और सामाजिक जीवन से जुड़े अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। फिल्म के प्रदर्शन के पश्चात उपस्थित दर्शकों ने इसकी विषय-वस्तु, निर्देशन और भावनात्मक गहराई की सराहना की।इमाम उमर अहमद इलियासी ने कहा, सबसे बड़ा धर्म इंसान और इंसानियत है और यही इस फिल्म का सार है। इफ्तार केवल एक परम्परा नहीं, बल्कि एक इबादत है, जो हमें जोड़ती है, आत्मा को निर्मल करती है और विभिन्न धर्मों के बीच एकता का भाव सुदृढ़ करती है। डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा, “यह कहानी मेरे लिए एक बेटी के समान है, जिसे दूसरों के हाथों में सौंपने के बाद एक नए रूप में खिलते देखना एक भावपूर्ण अनुभव रहा। यदि यह फिल्म एक भी व्यक्ति के हृदय में सकारात्मकता जगा सके, तो मेरे लिए यह ऑस्कर अवॉर्ड जैसी उपलब्धि है। अन्य वक्ताओं ने अपने उद्बोधनों में कहा कि ‘इफ्तार’ जैसी फिल्में आज के समय में अत्यंत प्रासंगिक हैं, क्योंकि वे समाज को जोड़ने और संवाद की संस्कृति को सुदृढ़ करने का कार्य करती हैं।इस अवसर पर वक्ताओं ने यह भी रेखांकित किया कि कला और सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन और मानवीय मूल्यों के प्रसार का सशक्त साधन हैं। ‘इफ्तार’ इसी दिशा में एक सार्थक पहल है, जो दर्शकों को आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती है।कार्यक्रम के दौरान श्री अभय मिश्रा ने डॉ. सच्चिदानंद जोशी की कहानी के मर्म और संदेश पर बात की। उनके रचनाकर्म पर बात करते हुए श्री मिश्र ने कहा कि उनकी कहानियों के किरदार हम सबके बीच के लोग हैं और उनकी कहानियों का मर्म वही समझ सकता है, जिसका मन खुला हो। कार्यक्रम का संचालन संसद टीवी की एंकर प्रीति सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन आईजीएनसीए के मीडिया सेंटर के प्रमुख श्री अनुराग पुनेठा ने किया। यह आयोजन न केवल एक फिल्म के लोकार्पण का अवसर था, बल्कि विविध आस्थाओं के बीच सौहार्द, शांति और एकता के संदेश को पुनर्स्मरण कराने का एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रयास भी सिद्ध हुआ।

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