*फिरोजाबाद*। शहर के अटल पार्क में मुसाफिर कैफे के संचालन को लेकर उठे सवाल अब सिर्फ अनुमति तक सीमित नहीं रह गए हैं। नगर निगम से टेंडर के जरिए कैफे संचालन की अनुमति मिलने और रात में खोलने की छूट की पुष्टि तो हो गई, लेकिन पार्क में आने वाले आम नागरिकों के साथ कथित अभद्रता और दबंगई के आरोपों ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। सवाल उठ रहा है कि नगर निगम ने कैफे चलाने का ठेका दिया है या सार्वजनिक पार्क में आने वाले लोगों पर रौब गांठने का अधिकार भी सौंप दिया है?दरअसल, अटल पार्क में आने वाले लोगों के साथ कथित अभद्रता, गाली-गलौज और दबंगई की शिकायत सामने आई है। शिकायतकर्ता निक्की शर्मा ने पप्पू कश्यप और राहुल सहित कुछ लोगों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत के मुताबिक, कैफे में बैठने वाले कुछ लोग शराब के नशे में पार्क में आने-जाने वाले लोगों से अभद्रता करते हैं। विरोध करने पर गाली-गलौज और धौंस जमाने का आरोप है। यहां तक कि कुछ लोगों पर खुद को पार्क का मालिक बताकर आम नागरिकों को डराने का भी आरोप लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
*अनुमति कारोबार की मिली, पार्क में दबंगई की नहीं!*
मामले में नगर आयुक्त से फोन पर वार्ता की गई तो उन्होंने बताया कि मुसाफिर कैफे को टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से संचालन की अनुमति दी गई है। रात में कैफे खोलने की भी अनुमति है। नगर आयुक्त के इस बयान के बाद अनुमति को लेकर स्थिति तो स्पष्ट हुई, लेकिन अब सवाल कैफे के संचालन के तरीके पर है। सार्वजनिक पार्क में परिवार और बच्चों के साथ पहुंचने वाले लोगों को यदि कथित अभद्रता का सामना करना पड़ रहा है तो इसकी जवाबदेही आखिर किसकी होगी?
*टेंडर की शर्तें क्या हैं, सामने आए पूरा हिसाब!*
कैफे को किस तारीख को टेंडर आवंटित हुआ? किस व्यक्ति या फर्म के नाम अनुबंध किया गया? इसकी अवधि कितनी है और संचालन के लिए क्या शर्तें निर्धारित की गई हैं? इन सवालों का जवाब सार्वजनिक होना जरूरी है। खासकर यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्या अनुबंध में पार्क की गरिमा, स्वच्छता, सुरक्षा और आगंतुकों के साथ सम्मानजनक व्यवहार की जिम्मेदारी भी तय की गई है।
*रात में खुलने की छूट, निगरानी का जिम्मा किसका?*
नगर आयुक्त ने रात में संचालन की अनुमति होने की पुष्टि की है। ऐसे में यह जानना भी जरूरी है कि कैफे को रात कितने बजे तक खोलने की अनुमति है और निर्धारित समय के बाद निगरानी की व्यवस्था क्या है? पार्क में देर शाम तक परिवारों और बच्चों की आवाजाही रहती है। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था और अनुशासन सुनिश्चित करना किसकी जिम्मेदारी है, यह भी स्पष्ट होना चाहिए।
*शिकायतों पर कार्रवाई कब?*
अटल पार्क शहर का सार्वजनिक स्थल है, किसी व्यक्ति या प्रतिष्ठान की निजी जागीर नहीं। यहां आने वाले प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और सम्मानजनक माहौल मिलना चाहिए। यदि कैफे से जुड़े लोगों पर लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो नगर निगम को अनुबंध की शर्तों के तहत कार्रवाई पर विचार करना चाहिए।फिलहाल निगाहें नगर निगम के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या शिकायतों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या टेंडर की शर्तें सार्वजनिक होंगी? और क्या कैफे संचालक को सार्वजनिक पार्क में अनुशासन बनाए रखने के लिए जवाबदेह बनाया जाएगा? इन सवालों का जवाब मिलना अभी बाकी है।