वाराणसी मिर्जामुराद : अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर शुक्रवार को प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम नागेपुर में सैकड़ों बुनकर और दिहाड़ी मजदूरों ने सरकार से बुनकरी बचाने, रोजगार और मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर तख्ती, बैनर के साथ रैली निकाली। रैली यात्री प्रतीक्षालय, लोक समिति आश्रम,नंदघर होते हुए अम्बेडकर पार्क तक निकाली गई, इस दौरान लोगों ने रोटी कपड़ा और मकान, माँग रहा मजदूर किसान,भीख नही अधिकार चाहिये जीने का सम्मान चाहिए, बुनकरों के कर्जे माफ करो आदि नारे लगाकर मजदूरों के अधिकार के प्रति जागरुक किया. गांव के अम्बेडकर पार्क में आयोजित सभा में लोगों ने कहा कि सभी को बिना भेदभाव के जीने का अधिकारी होना चाहिए। आज भी कुल मजदूरों के 93% प्रतिशत मजदूर असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जिनकी कोई सामाजिक सुरक्षा नहीं है. वे गरीबी से भयंकर रूप से लड़ रहे हैं. जिनके अधिकारों की रक्षा करना जरुरी है। इस अवसर पर बिजली विभाग की तरफ से बुनकरों की समस्या को लेकर कैम्प लगाया गया जिसमें दर्जनों बुनकरों और ग्रामीणों ने अपनी शिकायत दर्ज कराई. कैंप में आए अधिशासी अभियंता अभिषेक कुमार और उपखण्ड अधिकारी मुकेश यादव, लाईन मैन रविन्द्र पटेल ने अतिशीघ्र समस्या समाधान का आश्वासन दिया.read more:https://pahaltoday.com/awareness-campaign-launched-in-ghazipur-under-mission-shakti-phase-5-0-anti-romeo-team-active/ सभा में सर्व सेवा संघ उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष वरिष्ठ गांधीवादी समाजसेवी रामधीरज भाई ने कहा कि महगाई व बेरोजगारी की समस्या से मजदूरों की कमर टूट गयी है। गांवों में लाखों मजदूर बेरोजगार घर पर बैठे हैं। महंगाई से निर्माण के 80 फीसद कार्य बंद चल रहे हैं। इससे मजदूरों को दैनिक मजदूरी भी नहीं मिल रही है। दैनिक उपभोग की वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं। मजदूरी न मिलने से गरीब व मजदूर परिवारों को एक वक्त का खाना भी नसीब नहीं हो पा रहा है। लोक समिति संयोजक नन्दलाल मास्टर ने कहा कि बनारसी साड़ी का धंधा मंदा पड़ा है, जिससे लाखों बुनकर भुखमरी के कगार पर है.भारतीय सामुदायिक कार्यकर्ता मंच (आईकन) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद मूर्ति ने कहा कि रोजाना हजारों मजदूर गांव से किराया भाड़ा लगाकर शहर के विभिन्न मजदूर मण्डियों में जाते हैं। दिनभर खड़े रहने के बाद शाम को बिना काम के ही वापस घर लौट आते हैं। मजदूरों ने सरकार से मांग किया है कि उन्हें गांव में स्थाई रोजगार दिलाया जाय। सभी बुनकर और दिहाड़ी मजदूरों के राशन कार्ड बनाए जांय। ताकि वह बच्चों का पेट भर सकें। बुनकर प्रकोष्ठ सलाहकार उत्तर प्रदेश शैलेश ने मांग किया कि न्यूनतम दैनिक मजदूरी 600 रुपए तय हो। 55 वर्ष से ऊपर के मजदूर को 3000 रुपये प्रतिमाह वृद्धावस्था पेंशन और महिला मजदूरों को मातृत्व अवकाश सुनिश्चित किया जाय। बुनकर मजदूरों को निःशुल्क स्वास्थ्य बीमा और सभी देहाड़ी मजदूरों का श्रम विभाग में अनिवार्य रूप से पंजीकरण सुनिश्चित किया जाय। बुनकरों को फ्लैट रेट पर बिजली देने और उनके पुराने बिल और कर्जे माफ किया जाए.कार्यक्रम में मुख्य रूप से आल इंडिया बुनकर फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुहम्मद अकरम, रमेश जादूगर, संतोष बी डी सी, शिवकुमार, दिलीप, कुलदीप, कमलेश, विशाल, लालमन, छोटेलाल, पिंटू राजभर, रजत, जगदीश, सूरज, विकाश, माला, आशा,अनिता, मनीषा, लीला, बबीता, निशा, कुसुम, वन्दना,ओमप्रकाश, संतोष, आशा,आदि रहे। रैली का नेतृत्व लोक समिति संयोजक नन्दलाल मास्टर और संचालन दिहाड़ी मजदूर के संयोजक रामबचन ने किया। अतिथियों का स्वागत शिव कुमार और धन्यवाद ज्ञापन श्यामसुंदर मास्टर ने किया.