ललितपुर। दशलक्षण महापर्व में सिद्ध क्षेत्र पावागिरि सहित तालबेहट के पारसनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में पं. संतोष कुमार जैन शास्त्री अमृत एवं वासुपूज्य दिगम्बर जैन मंदिर में बाल ब्रह्मचारिणी मानी दीदी झाँसी के निर्देशन में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों चल रहे है। सुबह भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुँचकार अभिषेक-शांतिधारा की क्रियाएँ एवं उत्तम आकिंचन धर्म की साधना की। संतोष शास्त्री ने धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए कहा उत्तम आकिंचन हमें राग-द्वेष से मुक्त ही नहीं करता अपितु आत्मा और शरीर के भेद को बताने वाला है। यह धर्म हमें सिखाता है कि आत्मा इस शरीर से भिन्न है। इसमें 14 अंतरंग एवं 10 बाह्य कुल 24 प्रकार के परिग्रहों का त्याग किया जाता है।read more:https://pahaltoday.com/demand-to-remove-government-country-liquor-shop-villagers-stage-protest-at-the-collectorate/#google_vignette वासुपूज्य दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित भक्तामर एवं दशलक्षण महामंडल विधान में देवेंद्र बसार, अनील बबीना, चक्रेश बुढ़पुरा, भूपेंद्र जैन, कपिल मोदी आदि ने प्रमुख भूमिका निभाई। अलका हितेंद्र पवैया ने मंगल आरती उतारी। दोपहर में तत्वार्थ सूत्र का स्वाध्याय किया। रात्रि में णमोकार महामंत्र का पाठ एवं मधुर संगीत की सुंदर सुर लहरियों के मध्य महाआरती के उपरांत श्रेष्ठी जनों ने आचार्य श्री का चित्र अनावरण कर ज्ञानदीप प्रज्वलित किया। मानी दीदी ने कहा जो दान साधक की साधना में सहयोगी बने वह उत्तम त्याग है। उन्होंने कहा इस संसार में किंचित मात्र भी कुछ मेरा नहीं है, जिसे अपना समझ बैठा है वह जीवन का सबसे बड़ा भ्रम है यही उत्तम आकिंचन सभी धर्मों का सार है। सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत बुंदेलखंड की बेटी अर्चना जैन मंजरी दिल्ली के भजनों की भक्ति में श्रद्धालु झूमे एवं डांडिया नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी। विभा अर्पण जैन ने सुंदर भक्ति नृत्य के लिए 21 बच्चों को पुरस्कार प्रदान किए। कार्यक्रम में सकल दिगंबर जैन समाज का सक्रिय सहयोग रहा। संचालन विशाल जैन पवा ने किया।