2050 तक जानलेवा गर्मी का खतरा, प्रलय जैसी स्थिति से दहशत में दुनिया

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नई दिल्ली। आने वाले दो दशक मानवता के अस्तित्व के लिए सबसे निर्णायक साबित होने वाले हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और वैज्ञानिकों की चेतावनियां एक भयावह भविष्य की ओर इशारा कर रही हैं। यदि वर्तमान उत्सर्जन और प्रकृति के दोहन की गति यही रही, तो साल 2040 से 2050 के बीच दुनिया के कई शहरों में गर्मी इतनी जानलेवा हो जाएगी कि बिना कृत्रिम कूलिंग के घर से बाहर निकलना मौत को दावत देने जैसा होगा। प्रकृति, जो प्रो-क्रिएशन यानी जीवन की उत्पत्ति का आधार है, उसे आज हम अपनी लालसा से बांझ बना रहे हैं। इसे एक रूपक से समझें तो जब धन का दुरुपयोग करने वाले दुर्योधन और गलत नीतियों का साथ देने वाले दुशासन मिलते हैं, तो वे प्रकृति रूपी पांचाली का चीरहरण करते हैं। हम इंसान ही आज प्रकृति के पांच तत्वों का अपमान कर रहे हैं, जिसका खामियाजा आने वाली पीढ़ियों को भुगतना होगा। आज हम संपत्ति खड़ी कर सकते हैं, लेकिन 20 साल बाद जब वही जमीन बाढ़ या भूस्खलन में समा जाएगी और लहलहाते खेत सूरज की तपिश से जल जाएंगे, तब उस धन का कोई मूल्य नहीं बचेगा।read more:https://pahaltoday.com/storm-and-rain-wreak-havoc-in-myorpur-uprooting-trees-and-electricity-poles/ विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, 2050 तक शहरों में खतरनाक गर्मी से प्रभावित गरीबों की संख्या में 700 प्रतिशत की वृद्धि होगी। दक्षिण-पूर्व एशिया और भारत जैसे देशों में हीट इंडेक्स 51डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जहां इंसान कुछ घंटों से ज्यादा बाहर नहीं रह पाएगा। यह गर्मी केवल एक मौसम नहीं, बल्कि एक साइलेंट किलर बन जाएगी। जल संकट की स्थिति और भी भयावह है। हिमालय के ग्लेशियर, जो एशिया की जीवनरेखा हैं, 2050 तक अपने अधिकतम पिघलाव (पीक वॉटर) तक पहुंच जाएंगे। इसके बाद नदियों में पानी कम होने लगेगा। अनुमान है कि 2100 तक 50 से 80 प्रतिशत ग्लेशियर खत्म हो जाएंगे, जिससे गंगा, यमुना और ब्रह्मपुत्र जैसी नदियां सूखने की कगार पर होंगी। इसका सीधा असर खेती, बिजली उत्पादन और दो अरब लोगों की प्यास पर पड़ेगा। बढ़ते तापमान और सूखती नदियों के कारण लाखों प्रजातियां विलुप्त हो जाएंगी। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रलय जैसा यह माहौल इस सदी के अंत तक पूरी तरह प्रभावी हो सकता है, लेकिन यदि उत्सर्जन कम नहीं हुआ तो यह संकट 2070 तक ही दस्तक दे देगा। अब फैसला हमारे हाथ में है हमें अपने बच्चों को सूखी नदियां और जहरीली गर्मी वाला प्रलय देना है या एक सुरक्षित और हरी-भरी प्रकृति। 2040-2050 का दशक हमारे सुधार का आखिरी मौका है।

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