13 वर्षों से चैंबर विहीन अधिवक्ताओं की दुर्दशा, आश्वासन आज भी अधूरे

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कानपुर देहात न्यायालय भवन के मुख्य द्वार पर बड़े भू-भाग में टट्टर की कैन्टीन से प्रतिवर्ष लगभग पाँच लाख रुपये का किराया, लेकिन न्याय प्रशासन के अभिन्न अंग अधिवक्ता आज भी चैंबर जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित; जिला जज से स्थायी व्यवस्था तक अस्थायी शेड की अनुमति का अनुरोध read more:https://khabarentertainment.in/509-vidyut-sakhis-in-bijnor-receive-thermal-printers-instant-electricity-bill-receipts-will-now-be-available-at-doorsteps/जनपद न्यायालय, कानपुर देहात में अधिवक्ताओं के लिए चैंबर की गंभीर एवं 13 वर्षों से लंबित समस्या के समाधान हेतु जिला बार एसोसिएशन, कानपुर देहात के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने जिला जज, कानपुर देहात को प्रार्थना पत्र देकर अनुरोध किया है कि जब तक अधिवक्ताओं को स्थायी चैंबर भवन अथवा चैंबर हेतु भूमि उपलब्ध नहीं करा दी जाती, तब तक न्याय भवन के सामने स्थित खुली भूमि पर अधिवक्ताओं को अस्थायी शेड/चैंबर स्थापित कर बैठने की अनुमति प्रदान की जाए।प्रार्थना पत्र में कहा गया है कि 19 जुलाई, 2013 को नए न्यायालय भवन के उद्घाटन के समय अधिवक्ताओं को चैंबर भवन एवं चैंबर हेतु भूमि उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था। इसके लिए अधिवक्ताओं की सूची भी तैयार की गई, किंतु 13 वर्ष बीत जाने के बाद भी न तो चैंबर भवन का निर्माण हो सका और न ही चैंबर हेतु भूमि उपलब्ध कराई जा सकी। इस दौरान अधिवक्ताओं ने समय-समय पर ज्ञापन दिए, आंदोलन किए और लगातार मांग उठाई, फिर भी समस्या आज तक जस की तस बनी हुई है।प्रार्थना पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि न्यायालय परिसर के मुख्य गेट संख्या-1 के निकट बड़े भू-भाग पर वर्षों से टट्टर की कैन्टीन संचालित की जा रही है, जिसके संचालन से प्रतिवर्ष लगभग पाँच लाख रुपये का किराया प्राप्त होता है। इसके विपरीत न्याय प्रशासन के अभिन्न एवं अपरिहार्य अंग अधिवक्ता आज भी चैंबर जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित हैं। चैंबर के अभाव में अनेक अधिवक्ताओं को न्यायालय परिसर के बाहर निजी भवनों में भारी किराया देकर चैंबर संचालित करना पड़ रहा है, जबकि न्याय भवन के भीतर ही मुवक्किलों से मिलने के कारण भीड़, शोर-शराबा, गंदगी एवं अव्यवस्था बनी रहती है। गोपनीय विधिक परामर्श देने तथा अभिलेखों के सुरक्षित रख-रखाव में भी गंभीर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।इस संबंध में जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र प्रताप सिंह चौहान ने कहा कि 19 जुलाई, 2026 को नए न्यायालय भवन में अधिवक्ताओं के चैंबर विहीन जीवन के 13 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। यह अत्यंत विडंबनापूर्ण स्थिति है कि न्यायालय परिसर के मुख्य द्वार पर बड़े भू-भाग में टट्टर की कैन्टीन वर्षों से संचालित हो रही है, लेकिन न्याय प्रशासन के अभिन्न अंग अधिवक्ताओं के लिए आज तक चैंबर की मूलभूत व्यवस्था नहीं हो सकी। यह केवल अधिवक्ताओं की दुर्दशा का विषय नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था की कार्यकुशलता, गरिमा और वादकारियों की सुविधा से भी सीधा जुड़ा हुआ प्रश्न है।उन्होंने कहा कि न्यायालय परिसर का उद्देश्य केवल आय अर्जित करना नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था को अधिक सुलभ, प्रभावी और व्यवस्थित बनाना है। जब तक स्थायी चैंबर भवन का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक न्याय भवन के सामने स्थित खुली भूमि पर अधिवक्ताओं को अस्थायी शेड स्थापित करने की अनुमति दिया जाना न्यायोचित, व्यावहारिक और जनहित में आवश्यक है। इससे न्याय भवन के भीतर भीड़ एवं अव्यवस्था कम होगी, अधिवक्ताओं को मुवक्किलों से गोपनीय रूप से विचार-विमर्श करने की सुविधा मिलेगी तथा न्यायिक कार्य अधिक व्यवस्थित एवं गरिमापूर्ण वातावरण में संपादित हो सकेंगे।उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अधिवक्ताओं के 13 वर्षों से लंबित इस मूलभूत प्रश्न पर जिला जज संवेदनशीलतापूर्वक विचार कर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेंगे।

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