सोनभद्र। डाला क्षेत्र में एक निजी विद्यालय के कथित मानकविहीन संचालन का मामला अब केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सैकड़ों बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है। विद्यालय की मान्यता और वास्तविक संचालन स्थल अलग-अलग होने के आरोपों ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यदि विद्यालय निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित हो रहा है तो इसका सीधा असर बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और उनके भविष्य पर पड़ सकता है। read more:https://pahaltoday.com/general-ns-raja-subramani-becomes-the-new-cds-of-the-country/
जानकारी के अनुसार, विभागीय अभिलेखों में विद्यालय को लगभग ढाई बीघा भूमि के आधार पर मान्यता प्रदान की गई है, जबकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि विद्यालय का संचालन कथित रूप से मात्र ढाई से तीन बिस्वा भूमि पर किया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस आधार पर मान्यता दी गई थी, क्या वर्तमान में विद्यालय उसी मानक पर संचालित हो रहा है या नहीं। अभिभावकों का कहना है कि यदि विद्यालय में पर्याप्त भूमि, खेल मैदान, कक्षाओं, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं का अभाव है, तो इसका खामियाजा मासूम बच्चों को भुगतना पड़ सकता है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग की उदासीनता के कारण बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि इस संबंध में कई बार शिकायतें की गईं और मामला विकास खंड चोपन के खंड शिक्षा अधिकारी (एबीएसए) के संज्ञान में भी लाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे विभागीय कार्यशैली और निगरानी तंत्र पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो यह न केवल मान्यता संबंधी नियमों का उल्लंघन होगा, बल्कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण और सुरक्षित शिक्षा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पर भी प्रश्नचिह्न होगा। ऐसे में संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप अभिभावकों का कहना है कि विद्यालयों को मान्यता इसलिए दी जाती है ताकि बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण, पर्याप्त संसाधन और सुरक्षित परिसर मिल सके। यदि विद्यालय निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित नहीं हो रहा है, तो यह बच्चों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा। क्षेत्रीय नागरिकों, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन तथा शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने तथा दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।