आज शरद पूर्णिमा की रात है। आश्विन मास का पूर्ण चंद्रमा। वर्ष का सबसे उज्ज्वल, सबसे शीतल और सबसे पूर्ण चंद्रमा।हमारे शास्त्र कहते हैं कि इस रात चंद्रमा अमृत बरसाता है – मधुरता, शांति और आरोग्य। यह ग्रीष्म के सूर्य की तरह कठोर नहीं है। यह जलाता नहीं। यह शीतलता देता है, सुकून देता है, पोषण देता है। जब मैं इस चंद्रमा को देखता हूँ, तो मुझे लगता है कि हमारी किशोरियाँ – हमारे परिवारों में, समाज में, संस्थाओं में, जिनमें प्रयास भी शामिल है – बिल्कुल शरद पूर्णिमा जैसी हैं। वे भी पूर्ण होने की दहलीज पर हैं।
दूज से पूर्णिमा तक: बड़े होने की यात्रा
जैसे चंद्रमा को पूर्णिमा बनने में पंद्रह रातें लगती हैं, वैसे ही एक किशोरी धीरे-धीरे, हर दिन, अपनी पूर्णता की ओर बढ़ती है। वह अब बच्ची नहीं रही, अभी पूरी महिला भी नहीं बनी। यह उसका सबसे नाजुक, सबसे दीप्तिमान पड़ाव है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम उसे एक सुरक्षित मंच दें, ताकि वह स्वयं में पूर्ण बन सके – विचारों में पूर्ण, भावनाओं में पूर्ण, अपनी संभावनाओं में पूर्ण।
शीतल, कठोर नहीं: शांत शक्ति की ताकत
मैं हमेशा चाहता हूँ कि वे शीतल बनें, कठोर नहीं, हालांकि अधिकांश समय यह संभव नहीं हो पाता। फिर भी, शरद का चंद्रमा हमें शांत शक्ति का पाठ पढ़ाता है। वह अपनी शीतलता के लिए जाना जाता है। वह हमें सिखाता है कि सच्ची शक्ति शोर करने वाली या आक्रामक नहीं होती।हम अपनी बच्चियों को यही सिखाने का प्रयास कर रहे हैं – मजबूत बनो, पर शांत रहो; स्पष्ट बनो, पर दयालु रहो। एक ऐसी दुनिया में जो उन्हें सुने जाने के लिए चिल्लाने को कहती है, हम चाहते हैं कि वे चंद्रमा की तरह बनें, जिसकी मौन, शीतल रोशनी ही पूरी दुनिया को रोशन करने के लिए काफी है।read more:https://pahaltoday.com/mobile-court-visits-ballia-to-hear-grievances-of-persons-with-disabilities-state-commissioner-issues-strict-directives/
भावनाओं से परिपूर्ण, करुणा से भरी
शरद पूर्णिमा को प्रेम की रात, रस की रात, भावनाओं की रात कहा जाता है। यह वह रात है जब हृदय खिल उठता है। हमारी किशोरियाँ भी वैसी ही हैं – भावनाओं से भरी, करुणा से भरी, सहानुभूति से भरी। वे अपने छोटे भाई-बहनों का ध्यान रखती हैं, अपनी सहेलियों की रक्षा करती हैं, अपने परिवार के लिए गहराई से महसूस करती हैं। यह भावना उनकी कमजोरी नहीं है। यह उनका अमृत है। यही उन्हें कल की उपचारक, नेता, माँ और बदलाव लाने वाली बनाएगा।
चमकने के लिए संरक्षण की आवश्यकता
चंद्रमा अपना प्रकाश तभी बरसा सकता है जब आकाश स्वच्छ हो। यदि बादल उसे ढक लें, तो उसकी रोशनी हम तक नहीं पहुँच सकती। हमारी बच्चियाँ भी वैसी ही हैं। उन्हें एक स्वच्छ आकाश चाहिए – एक सुरक्षित वातावरण, शिक्षा, पोषण, बाल विवाह और दुर्व्यवहार से सुरक्षा, और सपने देखने की स्वतंत्रता। यदि हम उनकी रक्षा करेंगे, तो वे अपनी रोशनी से पूरे समाज की रक्षा करेंगी।प्रयास में, और हमारे परिवार और समाज में, हम ऐसी हजारों शरद पूर्णिमाओं के साथ काम करते हैं। हर लड़की अपने आप में एक चंद्रमा है – पूर्ण होने की प्रतीक्षा में, शीतल और शांत होकर चमकने की प्रतीक्षा में, इस दुनिया पर अपनी करुणा और ममता का अमृत बरसाने की प्रतीक्षा में।
आज, शरद पूर्णिमा के दिन, आइए एक शपथ लें। आइए एक वादा करें, एक संकल्प लें – कि जब वह पूर्ण होने जा रही हो तो हम उसके पंख नहीं कतरेंगे। आइए उसे वह आकाश दें जिसकी वह हकदार है। क्योंकि जब एक किशोरी पूरी तरह से खिलती है, तो एक पूरी पीढ़ी रोशन हो जाती है।
—————-
( इंदू रानी सिंह, प्रयास जुवेनाइल एड सेंटर, नई दिल्ली की कार्यकारी निदेशक हैं। )