पीढ़ियों के द्वंद्व को संवेदनशीलता से उकेरता नाटक ‘संक्रमण’

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नई दिल्ली, । सुप्रसिद्ध कथाकार कामतानाथ की कालजयी कहानी ‘संक्रमण’ का प्रभावशाली मंचन पंचकोसी थिएटर ग्रुप, दिल्ली द्वारा रविवार को राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय परिसर स्थित सम्मुख सभागार में किया गया। उत्पल झा के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने पीढ़ियों के बीच बढ़ती दूरी, बदलते सामाजिक मूल्यों और पारिवारिक संबंधों की जटिलताओं को अत्यंत संवेदनशील ढंग से अभिव्यक्त किया।कहानी का केंद्र एक ऐसे सेवानिवृत्त पिता हैं, जो अपने अधिकार, अनुशासन और पारिवारिक नियंत्रण के क्षीण होते जाने से मानसिक द्वंद्व का अनुभव करते हैं। दूसरी ओर आधुनिक जीवन-दृष्टि वाला पुत्र बदलते समय के अनुरूप जीवन जीना चाहता है। दोनों पीढ़ियों के बीच का यही मौन संघर्ष नाटक का मुख्य कथ्य है।पिता की भूमिका में दीपक पंडित ने प्रभावशाली अभिनय करते हुए वृद्धावस्था की असुरक्षा, अकेलेपन और अधिकार-बोध की मनःस्थिति को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। पुत्र की भूमिका में लक्ष्य भंभानी ने संयमित एवं स्वाभाविक अभिनय से आधुनिक पीढ़ी की मानसिकता को प्रभावी ढंग से अभिव्यक्त किया। माँ की भूमिका निभाने वाली मीता मिश्रा ने दोनों पीढ़ियों के बीच भावनात्मक सेतु का कार्य करते हुए अपने अभिनय से दर्शकों को प्रभावित किया।निर्देशक उत्पल झा ने नाटक को यथार्थवादी शैली में मंचित करते हुए मूल कहानी की संवेदनशीलता और वैचारिक गहराई को बनाए रखा। संवादों, मौन दृश्यों तथा मंचीय गति का संतुलित प्रयोग प्रस्तुति की विशेषता रहा। संगीत परिकल्पना एवं निर्देशन भी उत्पल झा द्वारा किया गया, जिसने नाटक के भावपक्ष को और अधिक प्रभावशाली बनाया।साउंड ऑपरेशन आशु कुमार ने संभाला, जबकि मंच प्रबंधन की जिम्मेदारी चमन कसाना ने निभाई। सहायक निर्देशक के रूप में हर्षित वर्मा तथा प्रस्तुति समन्वयन में प्रतिभा झा की भूमिका उल्लेखनीय रही।read more:https://pahaltoday.com/star-hospital-is-proving-to-be-a-boon-for-poor-and-helpless-patients/नाटक की मंच-सज्जा और प्रकाश परिकल्पना भी अत्यंत प्रभावशाली रही, जिसने पात्रों की मानसिक अवस्थाओं और कथा के वातावरण को सशक्त ढंग से उभारा। प्रस्तुति के दौरान दर्शक पूरी तन्मयता से नाटक से जुड़े रहे और अंत में कलाकारों को भरपूर सराहना मिली।कुल मिलाकर ‘संक्रमण’ का यह मंचन न केवल एक उत्कृष्ट रंग-प्रस्तुति सिद्ध हुआ, बल्कि उसने समकालीन समाज में पीढ़ियों के बदलते संबंधों और पारिवारिक मूल्यों पर गंभीर विचार करने के लिए भी दर्शकों को प्रेरित किया।

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