यूरोप में प्रचंड गर्मी बनी आफत, फ्रांस में 1,000 लोगों की गई जान

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लंदन। यूरोप महाद्वीप इन दिनों रिकॉर्ड तोड़ भीषण गर्मी के प्रकोप से जूझ रहा है, जिसके कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और कई देशों में सैकड़ों लोगों की जान चली गई है। फ्रांस की पब्लिक हेल्थ एजेंसी ने रविवार को बताया कि पिछले सप्ताह रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी के दौरान देश में लगभग 1,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख ने गंभीर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यूरोप अब पृथ्वी पर सबसे तेज़ी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन गया है और उसे अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए तत्काल और अधिक प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। पिछले सप्ताह वीकेंड पर कई यूरोपीय देशों में तापमान के पुराने रिकॉर्ड टूट गए।  जर्मनी में नीसेमुंडे में तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो लगातार तीसरे दिन एक नया रिकॉर्ड था। चेक गणराज्य में भी अब तक का सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, जहां तापमान 41.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। ब्रिटेन में पूर्वी इंग्लैंड में तापमान 37.3 डिग्री सेल्सियस और स्विट्जरलैंड के बेसल में 38.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसने जून महीने के तापमान के नए रिकॉर्ड स्थापित किए। वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन नामक यूरोपीय वैज्ञानिकों के एक समूह की एक नई स्टडी में बताया गया है कि पिछले हफ्ते यूरोप में पड़ी रिकॉर्ड-तोड़ गर्मी और उमस, जलवायु परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) के बिना संभव नहीं होती।read more:https://pahaltoday.com/the-consumer-commission-settled-the-matter-by-giving-a-cheque-of-rs-55040/ इस तेजी से की गई स्टडी में पाया गया कि इतनी गर्मी का होना सिर्फ 50 साल पहले लगभग नामुमकिन था, और आज इसके होने की संभावना 20 साल पहले की तुलना में 200 गुना ज्यादा है, जो ग्लोबल वार्मिंग के भयावह प्रभावों को दर्शाता है।
पब्लिक हेल्थ फ्रांस के अनुसार, जिस बुधवार को फ्रांस में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ रही थी, तब 1,200 से अधिक मौतें हुईं, और उसके बाद के दो दिनों में हर दिन मौतों की संख्या बढ़कर 1,400 से अधिक हो गई। अप्रैल और मई में, यानी हीटवेव से पहले, फ्रांस में रोजाना मौतों की दर लगभग 900 से 1,000 थी, जिससे अतिरिक्त मौतों का आंकड़ा स्पष्ट होता है।  डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक टेड्रोस अदानोम घेब्रेयेसस ने भी बताया कि 21 जून के बाद से यूरोप में अत्यधिक तापमान की वजह से कुल 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। गर्मी के इस प्रकोप के कारण कई गंभीर परिणाम भी सामने आए हैं। जर्मनी में कई जगहों पर जंगल की भीषण आग लग गई, जैसे गोहरिशहाइड और ट्राइसेन गांव के पास। गोहरिशहाइड में दूसरे विश्व युद्ध के समय के गोला-बारूद से दूषित क्षेत्र होने के कारण आग बुझाने वालों का काम और भी मुश्किल हो गया। वहीं, बर्लिन पुलिस को भीड़ को ठंडा करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। लंदन एम्बुलेंस सर्विस ने बुधवार को भीषण गर्मी के कारण जानलेवा इमरजेंसी कॉल की रिकॉर्ड संख्या दर्ज की। बिजली गिरने की 1,156 घटनाएं भीषण गर्मी के बाद पूरे यूरोप में जबरदस्त आंधी-तूफान का दौर भी देखा गया। डेनमार्क में शनिवार को तापमान के नए रिकॉर्ड बने और रविवार सुबह तक बिजली गिरने की 1,156 घटनाएं दर्ज की गईं।  स्वीडन के एक एम्यूजमेंट पार्क में बिजली गिरने से तीन वयस्कों को अस्पताल ले जाया गया, जिनमें एक महिला गंभीर रूप से घायल थी। टेड्रोस ने चेतावनी देते हुए कहा, हीट स्ट्रेस (गर्मी का तनाव) को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, और यूरोप के घर, दफ्तर और स्कूल ऐसे तापमान के हिसाब से नहीं बने हैं। उन्होंने यूरोपीय देशों से तत्काल एक्शन प्लान लागू करने की अपील की, जिसमें तैयारी, बचाव और मजबूत स्वास्थ्य प्रणाली प्रतिक्रिया पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही गई है ताकि भविष्य में ऐसी आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

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