प्राचीन भारत की प्रशासनिक प्रणाली में राजा भी विधि के शासन की शपथ लेता था। इसके अलावा दुनिया में जब सुनियोजित राज व्यवस्था नहीं थी, तब भारत में गणतंत्र की स्थापना हो चुकी थी। स्वतंत्र भारत के संविधान में भी विधि के शासन को मूल संरचना में शामिल किया गया। संविधान में उल्लिखित नियमों का पालन अपरिहार्य है। इसमें विधि के शासन और लोक कल्याण और समानता की भावना का समावेश भी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने डॉ राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत में विधि के शासन का उल्लेख किया। उत्तर प्रदेश में इसको चरितार्थ किया गया है। इसके अनुरूप प्रदेश में कानून व्यवस्था को सुदृढ़ किया गया। यह नवरात्र का समय है।read more:https://pahaltoday.com/manveer-singh-arrested-near-nepal-border-sent-to-punjab-under-tight-security/
योगी आदित्यनाथ ने अपने शासन के प्रारंभ में ही नवरात्र के अवसर पर मिशन शक्ति योजना लागू की थी। इसे विधि के शासन का एक मॉडल के मॉडल रूप में प्रसिद्धि मिली। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को सत्यं वद। धर्मं चर। स्वाध्यायान्मा प्रमदः। का संदेश दिया। कहा कि विकसित भारत’ की परिकल्पना को साकार करने का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज हमारा संविधान है। डबल इंजन की सरकार ने संविधान की मूल भावना के अनुरूप प्रदेश में विधि के शासन को पूरी ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ लागू किया है। महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन देना विधि के शासन से संभव हुआ है। युवाओं को संवैधानिक मूल्यों के आधार पर अपनी सोच विकसित करनी चाहिए। इससे राष्ट्र को सर्वोच्च मानने का विचार जागृत होता है।