4.93 करोड़ की सड़क परियोजना पर सवाल, धूल-कीचड़ के बीच सफर को मजबूर जनता

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सोनभद्र। वाराणसी-शक्तिनगर मार्ग (एसएच-5) से जुड़े डाला-बिल्ली गजराज नगर संपर्क मार्ग के निर्माण कार्य को लेकर क्षेत्रीय लोगों में भारी नाराजगी व्याप्त है। करीब 4.93 करोड़ की लागत से स्वीकृत इस परियोजना का उद्देश्य आवागमन को सुगम और सुरक्षित बनाना था, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण कार्य की धीमी गति और अव्यवस्थित कार्यप्रणाली के कारण सड़क बदहाल स्थिति में पहुंच गई है।read more:https://pahaltoday.com/the-film-bolo-radhe-radhe-has-the-power-to-shake-our-soul-along-with-entertainment-ravi-bhatia/ग्रामीणों और राहगीरों का कहना है कि निर्माण कार्य चरणबद्ध तरीके से पूरा करने के बजाय जगह-जगह अधूरा छोड़ दिया गया है। कहीं नाली निर्माण अधूरा पड़ा है तो कहीं इंटरलॉकिंग और सड़क चैड़ीकरण का काम बीच में रोक दिया गया है। इससे मार्ग पर मलबा, गिट्टी और उबड़-खाबड़ हिस्से दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क चैड़ीकरण में भी समान मानकों का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर एक तरफ अधिक चैड़ीकरण और दूसरी तरफ कम चैड़ीकरण किए जाने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि संबंधित अधिकारियों और ठेकेदार की लापरवाही का खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में सड़क पर उड़ने वाली धूल राहगीरों और आसपास के निवासियों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। बाइक, ई-रिक्शा, टेंपो और पैदल चलने वाले लोग धूल के गुबार से परेशान हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि धूल के कारण सांस और आंखों से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं। वहीं बारिश होने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है। सड़क पर फैला निर्माण सामग्री का मलबा और अधूरा कार्य कीचड़ और जलभराव में बदल जाता है, जिससे दोपहिया वाहन चालकों और ई-रिक्शा चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्रीय लोगों के अनुसार कई बार वाहन फिसलने और पलटने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जनसुनवाई पोर्टल और अन्य माध्यमों से कई बार शिकायतें की गईं, लेकिन धरातल पर अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। लोगों ने जिलाधिकारी और लोक निर्माण विभाग के उच्च अधिकारियों से निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा परियोजना को समयबद्ध ढंग से पूरा कराने की मांग की है। क्षेत्रीय जनता का कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रही सड़क यदि मानकों के अनुरूप और समय पर पूरी नहीं हुई तो इसका सबसे बड़ा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ेगा। फिलहाल धूल, कीचड़ और अव्यवस्था के बीच लोगों का सफर मुश्किल बना हुआ है।

 

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