बाराबंकी। यूपी विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं। इससे पहले सभी राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारी शुरू कर दी है। सत्ता और विपक्ष के नेता नए-नए मुद्दों को लेकर नेताओं पर वार-पलटवार कर रहे हैं। जिले में लगतार बढ़ रहे पोस्टर वॉर भी इसी रणनीति का हिस्सा है। मंगलवार को समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश यादव एवं पूर्व रक्षामंत्री स्व. मुलायम सिंह यादव के विवादित होर्डिंग को लेकर सियासत गरमा गई है। बताया जा रहा है कि इस होर्डिंग में दोनों नेताओं को मुस्लिम टोपी पहने हुए दिखाया गया है। होर्डिंग में “दिल में बाबर, मुंह में राम” लिखा गया था। जिसकी सूचना मिलने के बाद सपा नेताओं ने विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। सपा नेता ताज बाबा राईन समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और पोस्टर उतारकर उसे फाड़कर हटा दिया। इससे पहले भी इसी तरह के विवादित पोस्टरों को सपा कार्यकर्ताओं ने उतारकर उसे फाड़ चुके हैं। हालांकि, उस होर्डिंग पर किसी व्यक्ति, संस्थान या संगठन का नाम नहीं था। शहर में इसके लगने से आने-जाने वालों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई। वहीं शाम को सपा जिलाध्यक्ष हाफिज अयाज अहमद के नेतृत्व में सपा नेताओं ने इसकी सूचना पुलिस को दी है। पुलिस होर्डिंग लगाने वालों के बारे में पता चला रही है। अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि ये होर्डिंग कब और किसने लगाया है। सपा जिलाध्यक्ष हाफिज अयाज ने कहा कि चंदा चोरी जैसे मुद्दों से भटकाने के लिए इस तरह की होर्डिंग लगाई जा रही हैं। इस मामले को पार्टी नेतृत्व के संज्ञान में लाया जाएगा और इसका मुकाबला करने के लिए रणनीति बनाई जाएगी।read more:https://khabarentertainment.in/administration-gears-up-for-kanwar-yatra-divisional-commissioner-issues-strict-directives/उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे होर्डिंग लगाकर राज्य का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ऐसे लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई करें इसके बाद से इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। इस मामले में कैबिनेट मंत्री अरविंद कुमार सिंह गोप ने इस तरह के कार्य को कायराना हरकत करार देते हुए बीजेपी पर जमकर हमला बोला है। उन्होंने इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इससे पहले 22 जून को भी शहर में ऐसी ही विवादित होर्डिंग लगाए जाने का मामला सामने आया था। उस समय शहर में विवादित होर्डिंग लगाए गए थे। वहीं, होर्डिंग लगाने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति या संगठन की पहचान के बारे में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और न ही प्रशासन ने इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान जारी किया है. एक तरह से स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में चुप्पी साधी हुई है।