इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ जर्नलिस्ट्स (आईएफजे) ब्रुसेल्स से संबद्ध नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट- इंडिया (एनजूये-आई) महिला प्रकोष्ठ, दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने महिला पत्रकारों के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों तथा कैंसर जागरूकता विषय पर एक व्याख्यान का आयोजन किया। दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट द्वारा संचालित कैंसर जागरूकता कार्यक्रम कैप्स सीएपीएस (कैंसर अवेयरनेस, प्रीवेंशन एंड स्क्रीनिंग) में संस्थान के प्रीवेंटिव ऑनकोलॉजी विभाग की वरिष्ठ सलाहकार डा आकांक्षा सिन्हा ने महिला एवं पुरूषों में पाए जाने वाले चार प्रमुख कैंसर और उनसे बचाव व एचपीवी (ह्यूमन पैपीलोमा वैक्सीनेशन) पर अहम जानकारी साक्षा की तथा इस विषय पर महिला पत्रकारों द्वारा पूछे गए प्रश्नों का भी जवाव दिया।read more:https://pahaltoday.com/kamalganj-outrage-erupts-against-smart-meters-consumers-warn-of-agitation/इस मौके पर एनयूजेआई अध्यक्ष रास बिहारी, एनयूजेआई महासचिव प्रमोद तिवारी, एनयूजेआई महिला प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय संयोजक वरिष्ठ पत्रकार प्रतिभा शुक्ला, एनयूजेआई के वरिष्ठ नेता मनोज मिश्रा के अलावा एनयूजेआई सचिव अमलेश राजू, एनयूजेआई सह संयोजक महिला प्रकोष्ठ उषा पाहवा, महासचिव दिल्ली पत्रकार संघ प्रमोद कुमार सिंह, डीजेए सचिव प्रियरंजन और प्रदीप श्रीवास्तव, सदस्य फजले गुुफरान सहित कई पत्रकार मौजूद रहे। सात जंतर मंतर पर आयोजित व्याख्यान में निशि भट्ट, अर्चना ज्योति, विजया लक्ष्मी सहित बड़ी संख्या में महिला पत्रकारों ने भी हिस्सा लिया। डॉ आंकाक्षा ने बताया कि महिलाओं में स्तन व सरवाइकल कैंसर तथा पुरूषों में फेफडें का कैंसर और ओरल कैंसर सबसे अधिक पाया जाता है। हाल में केंद्र सरकार द्वारा महिलाओं में पाए जाने वाले सरवाइकल कैंसर के लिए कारक ह्यूमन पैपीलोमा वायरस के खिलाफ एचपीवी (हयूमन पैपीलोमा वैक्सीन) की शुरूआत की है। दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में यह वैक्सीन निशुल्क लगाई जाती है, नौ साल से अधिक उम्र की बच्चियों के साथ ही यह वैक्सीन लड़को को भी दी जा सकती है, लड़कों में यह वैक्सीन कोलन कैंसर से बचाव में कारगर मानी गई है। डॉ आंकाक्षा ने बताया कि एचपीवी वैक्सीनेशन की अधिकतम उम्र 15 साल तक रखी गई है जबकि 45 वर्ष तक की महिलाएं भी इसे लगवा सकती हैं। कैंसर जागरूकता व्याख्यान कार्यक्रम में पत्रकारों ने भी अपने विचार रखे।