नई दिल्ली।पेट्रोलियम उत्पादों के आयात पर देश के खजाने पर पड़ने वाले भारी बोझ को कम करने और पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान खोजने के उद्देश्य से, वैज्ञानिकों ने एक बड़ा कमाल कर दिखाया है। इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल के बाद अब देश में एक नए तरीके का पेट्रोल-डीजल तैयार किया गया है, जो न सिर्फ बेहद सस्ता होगा, बल्कि सामान्य तेल जितना ही अच्छा एवरेज भी देगा। मात्र 32 रुपए प्रति लीटर की कीमत पर 62 किमी प्रति लीटर का एवरेज मिल जाएगा। वडोदरा स्थित गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) के वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक मिश्रित प्लास्टिक कचरे को पेट्रोल-डीजल जैसे ईंधन में बदल दिया है। यह नवाचार एक तरफ जहां ईंधन का एक नया और सस्ता विकल्प प्रदान करेगा, वहीं दूसरी ओर प्लास्टिक कचरे की गंभीर समस्या का भी समाधान करेगा।
परीक्षण सफल,इंजन बदलने की जरुरत नहीं यह फॉर्मूला केवल फाइलों या लैब तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे व्यावहारिक रूप से परख लिया गया है। भारत के एक प्रमुख दोपहिया निर्माता कंपनी की तीन मोटरसाइकिलों को इस पेस्ट्रो पेट्रोल से दौड़ाया गया और खास बात यह है कि इसके लिए इंजन में किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं हुई। इस प्लास्टिक वाले पेट्रोल से माइलेज भी लगभग सामान्य पेट्रोल जितना ही मिला; 100 सीसी की एक बाइक जिसने सामान्य पेट्रोल से 62 किलोमीटर प्रति लीटर का एवरेज दिया, वह प्लास्टिक से तैयार एक लीटर पेट्रोल से 60 किलोमीटर दौड़ी। एक और अच्छी खबर यह है कि इस पेट्रोल से होने वाला प्रदूषण भी निर्धारित मानकों के भीतर ही रहा, और इन मोटरसाइकिलों ने पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट भी प्राप्त किया। 100 किलो प्लास्टिक कचरे से बनेगा 50 किग्रा इंधन रिसर्च करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि 100 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे को प्रोसेस करके लगभग 50 किलोग्राम ईंधन निकाला जा सकता है। कच्चा तेल जहां 24 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर उत्पादित किया जा सकता है, वहीं अपग्रेड करने के बाद इसकी कीमत लगभग 32 रुपये प्रति लीटर होगी।read more:https://pahaltoday.com/khalsa-srcc-and-ramjas-college-win-in-pspb-baba-deep-singh-basketball/वैज्ञानिकों ने बताया कि इस तकनीक से उत्पादित तेल 90 फीसदी तक सामान्य पेट्रोल-डीजल जैसा ही है। इस पेस्ट्रो पेट्रोल में कितनी संभावनाएं हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एविएशन कंपनी एयरबस भी जीएसवी के साथ मिलकर काम कर रही है। कोशिश की जा रही है कि प्लास्टिक कचरे से विमान उड़ाने वाले ईंधन (जेट फ्यूल) को भी विकसित किया जा सके। इस प्लास्टिक वाले पेट्रोल से ईंधन बनाने की शुरुआत पहले उन जगहों पर की जा सकती है जहां प्लास्टिक का कचरा एक बड़ी समस्या है और ईंधन का पहुंचना उतना ही मुश्किल है, जैसे लेह, लद्दाख, केदारनाथ और बद्रीनाथ। इसके अलावा, झांसी के रेलवे लोकोमोटिव शेड और कोलकाता की छावनी में भी ऐसा किया जा सकता है। इसको लेकर विभिन्न मंत्रालयों में विचार-विमर्श चल रहा है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।