सदर सीट पर नए समीकरणों ने बढ़ाई सपा की धड़कनें, त्रिकोणीय मुकाबले के संकेत

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बाराबंकी। विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही जिले की सबसे चर्चित और प्रतिष्ठित सदर विधानसभा सीट पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। अभी तक मुख्य मुकाबला समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच माना जा रहा था, लेकिन हाल के दिनों में उभरे नए समीकरणों ने चुनावी गणित को पूरी तरह बदलने के संकेत दे दिए हैं। खासकर बसपा से एक मजबूत मुस्लिम चेहरे और भाजपा से कर्मी समाज के संभावित उम्मीदवार की चर्चा ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सदर सीट पर मुस्लिम, पिछड़ा और दलित वोट लंबे समय से जीत-हार तय करने में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में यदि बहुजन समाज पार्टी मुस्लिम समाज के किसी प्रभावशाली चेहरे को मैदान में उतारती है तो इसका सीधा असर समाजवादी पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक पर पड़ सकता है। यही वजह है कि सपा खेमे में इस संभावित समीकरण को लेकर चिंता बढ़ती दिखाई दे रही है। दूसरी ओर भाजपा में कर्मी समाज से जुड़े एक मजबूत चेहरे की दावेदारी की चर्चा भी जोर पकड़ रही है।read more:https://pahaltoday.com/district-magistrate-holds-meeting-of-the-district-drinking-water-and-sanitation-mission-issues-directives/ माना जा रहा है कि यदि भाजपा इस सामाजिक समीकरण पर दांव खेलती है तो गैर-यादव पिछड़े वर्गों में उसकी पकड़ और मजबूत हो सकती है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार कर्मी समाज का एक बड़ा वोट बैंक सदर सीट पर प्रभाव रखता है, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है। बहरहाल, दिलचस्प बात यह है कि अभी किसी भी दल ने अपने पत्ते पूरी तरह नहीं खोले हैं, लेकिन संभावित उम्मीदवारों को लेकर होने वाली चर्चाओं ने कार्यकर्ताओं के बीच उत्सुकता बढ़ा दी है। चाय की दुकानों से लेकर राजनीतिक बैठकों तक एक ही सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर सदर सीट पर किस दल का दांव सबसे भारी पड़ेगा? सूत्रों की मानें तो समाजवादी पार्टी अपने पारंपरिक सामाजिक गठजोड़ को मजबूत बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है, जबकि भाजपा संगठन और सामाजिक समीकरणों के सहारे चुनावी बढ़त बनाने की तैयारी में है। वहीं बसपा भी लंबे समय बाद इस सीट पर मजबूत उपस्थिति दर्ज कराने के प्रयास में दिखाई दे रही है। फिलहाल सदर विधानसभा सीट पर तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है, लेकिन इतना तय माना जा रहा है कि नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों ने मुकाबले को पहले से कहीं अधिक रोचक बना दिया है। आने वाले महीनों में उम्मीदवारों की घोषणा के साथ यह राजनीतिक शतरंज और दिलचस्प होने वाली है, जिस पर जिले भर की नजरें टिकी हुई हैं।

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