बहराइच l मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. संजय कुमार ने बताया कि मातृ एवं नवजात मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से अब जिले की प्रत्येक गर्भवती महिला की कम से कम छह प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) सुनिश्चित की जाएगी। पहले चार आवश्यक जांचों का ही प्रावधान था, इस संबंध में परिवार कल्याण विभाग द्वारा विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं और सभी स्वास्थ्य इकाइयों को इसका सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।read more:https://pahaltoday.com/childhood-extinguished-in-the-fire-of-enmity-the-brutal-murder-of-an-8-year-old-boy-in-bahraich-has-caused-a-sensation/
सीएमओ ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर एएनसी जांच मां और शिशु दोनों की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। जांचों की संख्या बढ़ने से न केवल हाई रिस्क प्रेग्नेंसी (उच्च जोखिम वाले गर्भ), एनीमिया, उच्च रक्तचाप और कुपोषण की समय रहते पहचान होगी, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु में होने वाले जन्मजात दोषों का भी आसानी से पता लग जाएगा। इससे समय रहते उचित उपचार और रेफरल की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सकती है, जिससे जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित रहते हैं। उन्होंने बताया कि नई व्यवस्था के तहत पहली एएनसी जांच 12 सप्ताह तक, दूसरी 16 से 20 सप्ताह, तीसरी 24 से 28 सप्ताह, चौथी 28 से 32 सप्ताह, पांचवीं 32 से 36 सप्ताह तथा छठी जांच 36 से 40 सप्ताह के बीच कराई जाएगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) दिवस पर दूसरी या तीसरी तिमाही में कम से कम एक जांच सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा जिन गर्भवती महिलाओं की संभावित प्रसव तिथि 31 जुलाई 2026 से पहले है, उनकी भी हर हाल में छह एएनसी जांच पूरी कराई जाएंगी। इसके लिए सीएमओ ने सभी चिकित्सा अधिकारियों, एएनएम और आशा कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है कि गर्भवती महिलाओं का समय से पंजीकरण कर नियमित जांच सुनिश्चित कराई जाए, ताकि सुरक्षित मातृत्व के लक्ष्य को और अधिक मजबूत बनाया जा सके। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के डीपीएम मो0 राशिद ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष में जिले में कुल 1,50,547 गर्भवती महिलाओं का एएनसी पंजीकरण किया गया, जबकि 1,40,296 महिलाओं का पंजीकरण गर्भावस्था की पहली तिमाही में ही सुनिश्चित कराया गया। ऐसे में नई व्यवस्था लागू होने से गर्भवती महिलाओं की नियमित निगरानी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में और सुधार होगा।