डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का भव्य आयोजन, विद्यार्थियों ने सीखे स्वस्थ जीवन के सूत्र

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दिल्ली। डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय में आयुष मंत्रालय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एक भव्य एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। महाविद्यालय की योग समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय के स्पोर्ट्स ग्राउंड में किया गया, जहाँ योग के माध्यम से स्वस्थ जीवन, मानसिक संतुलन तथा सकारात्मक जीवनशैली का संदेश दिया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ ‘वंदे मातरम्’ गीत के साथ हुआ। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. सदानंद प्रसाद मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ‘स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है’ योग एक ऐसा माध्यम है जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि मानसिक विकास, आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच को भी बढ़ावा देता है। उन्होंने विद्यार्थियों से योग को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के दौरान योग प्रशिक्षकों एवं विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विभिन्न योगासनों एवं प्राणायामों का अभ्यास कराया गया। प्रतिभागियों को ताड़ासन, पदहस्तासन, अर्धचक्रासन, त्रिकोणासन, समस्थिति आसन, भद्रासन, वज्रासन, उष्ट्रासन, शशकासन, मकरासन, भुजंगासन, सर्वांगासन, सेतुबंध आसन, पवनमुक्तासन, विश्रामासन तथा पर्वतासन सहित अनेक योग मुद्राओं की विधि एवं उनके स्वास्थ्य लाभों की जानकारी दी गई।योग विशेषज्ञों ने बताया कि ताड़ासन शरीर की लंबाई एवं संतुलन में सहायक होता है, जबकि पदहस्तासन हाथ-पैरों की मांसपेशियों को सुदृढ़ बनाता है, त्रिकोणासन कमर एवं शरीर की लचक बढ़ाने में लाभकारी है तथा भद्रासन मानसिक शांति और एकाग्रता को बढ़ाता है, जबकि वज्रासन पाचन क्रिया को सुदृढ़ करने के लिए अत्यंत उपयोगी माना जाता है और उष्ट्रासन तथा सेतुबंध आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने तथा शरीर की विभिन्न समस्याओं को दूर करने में सहायक बताए गए।read more:https://pahaltoday.com/retired-teachers-and-shikshamitras-honored-at-baragaon-brc/कार्यक्रम में कपालभाति, अनुलोम-विलोम तथा शीतली प्राणायाम का भी अभ्यास कराया गया। योग विशेषज्ञों ने बताया कि कपालभाति शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने में सहायक है तथा श्वसन तंत्र को मजबूत बनाती है। अनुलोम-विलोम प्राणायाम शरीर में ऊर्जा का संचार करता है और मानसिक तनाव को कम करने में प्रभावी है। वहीं शीतली प्राणायाम शरीर को शीतलता प्रदान कर मानसिक शांति स्थापित करता है।इस अवसर पर योग के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए वक्ताओं ने कहा कि योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित एवं अनुशासित बनाने की एक समग्र पद्धति है। योग मन, मस्तिष्क और शरीर के बीच सामंजस्य स्थापित करता है तथा व्यक्ति को तनावमुक्त एवं ऊर्जावान बनाता है वक्ताओं ने यह भी कहा कि योग विद्या प्राचीन चिकित्सा पद्धति का एक महत्वपूर्ण अंग है और नियमित योगाभ्यास व्यक्ति को स्वस्थ एवं सक्रिय जीवन प्रदान करता है।कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित योग प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में भूमि शर्मा,प्रथम वर्ष, से प्रथम स्थान, कुनिका, प्रथम वर्ष से द्वितीय स्थान तथा प्रेरणा कुमारी,प्रथम वर्ष से तृतीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को महाविद्यालय प्रशासन द्वारा सम्मानित किया गया।इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षकों द्वारा ‘इंटरनेशनल योगा’ नामक पुस्तक का भी विमोचन किया गया। पुस्तक विमोचन कार्यक्रम ने योग के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा विद्यार्थियों में अध्ययन एवं अनुसंधान की भावना को प्रोत्साहित करने का कार्य किया।कार्यक्रम के सफल आयोजन में योग समिति, महाविद्यालय ‌ के प्राचार्य सदानंद प्रसाद,‌ संयोजक संगीता शर्मा, सहसंयोजक डॉ.तूलिका सनाढ्य ‌ तथा सहयोगी‌ ‌ विद्यार्थी‌‌ लक्की, हिमांशु, हीना काजल का विशेष योगदान रहा। समापन अवसर पर वक्ताओं ने सभी प्रतिभागियों को नियमित योगाभ्यास करने और स्वस्थ भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का संदेश दिया। पूरे कार्यक्रम का वातावरण उत्साह, ऊर्जा और सकारात्मकता से परिपूर्ण रहा तथा सभी प्रतिभागियों ने योग को अपने दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संकल्प लिया।

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