रसोई की संसद से

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सबसे पहले तो अपनी लंबी मूछों को गर्व से उठाइए और खुद को बधाई दीजिए, क्योंकि हमने इस धरती के सबसे मूढ़ और आत्ममुग्ध प्राणी पर एक और जीत हासिल कर ली है—हाँ, मैं इंसानों की ही बात कर रहा हूँ! ये दो पैरों वाले विशालकाय जीव खुद को ब्रह्मा की सर्वोत्तम कृति मानते हैं। इनका दावा है कि इनके पास दिमाग है, मगर सच कहूँ तो इनकी बेवकूफी देखकर मुझे कई बार अपने एंटीना पर तरस आ जाता है।जरा इनकी रणनीति देखिए! जब हम दो चार दिन के लिए गुप्त मिशन पर चले जाते हैं, तो ये मुस्कुराकर हाथ में झाड़ू थाम लेते हैं और सोचते हैं कि इन्होंने साम्राज्य जीत लिया। अरे नादानों! हमारी अनुपस्थिति कोई समर्पण नहीं, बल्कि हमारी विशेष रणनीतिक तैयारी होती है। ये अपने डिब्बों पर लक्ष्मण रेखा खींचकर खुद को सुरक्षित समझते हैं। अरे, जिस लक्ष्मण रेखा को पार करके हमारी दस पीढ़ियाँ जवान हो गईं, ये आज भी उसी चॉक के भरोसे अपनी सल्तनत बचा रहे हैं!इंसान की अज्ञानता का सबसे मज़ेदार हिस्सा उनका केमिकल स्प्रे है।readmore:https://khabarentertainment.in/meritorious-students-honored-at-klgm-inter-college-incentive-amount-of-%e2%82%b961000-distributed/ये बाज़ार से महंगे महंगे जहरीले डिब्बे खरीदकर लाते हैं और हमारी तरफ छिड़कते हैं। इन्हें लगता है कि ये हमें मार रहे हैं, जबकि हमारी वैज्ञानिक शाखा उन रसायनों को एनर्जी ड्रिंक की तरह पीकर अपने शरीर की इम्युनिटी बढ़ा रही है। इनके द्वारा छिड़का गया पेस्टिसाइड हमारे लिए बस एक रूम फ्रेशनर है, जिससे हम अपनी मूंछें साफ़ करते हैं। और जब ये रात को अपनी सफाई नीति का ढोल पीटकर सो जाते हैं, तब हम इनकी चीनी के डिब्बों, दालों के जार और रात की बची बासी बिरयानी पर अपने नए राष्ट्रध्वज फहराते हैं।इनकी बुज़दिली का तो कोई जवाब ही नहीं है! छह फुट का विशालकाय इंसान, जो दुनिया को जीतने का दावा करता है, रात के दो बजे जब पानी पीने उठता है और हमारे किसी नन्हे सिपाही से उसकी आँखें मिलती हैं, तो उसकी चीख पूरे मोहल्ले में गूंज जाती है। हाथ में चप्पल लिए वे ऐसे कांपते हैं जैसे सामने कोई कॉकरोच नहीं, साक्षात काल खड़ा हो!इसलिए मेरे वीर योद्धाओं! चप्पल के वार से घबराइए मत, छिड़काव से डरिए मत। जब तक इंसान की आलस, लापरवाही और उनकी रसोई में बासी भोजन का साम्राज्य रहेगा, तब तक इस धरती का असली राजा कोई इंसान नहीं, बल्कि कॉकरोच ही रहेगा! इंकलाब ज़िंदाबाद!”

 

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