ईद-उल-अजहा त्याग, समर्पण और अल्लाह की रज़ा का त्योहार : डॉ. कुँवर मजहर खान

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हापुडb      सामाजिक कार्यों में  अग्रणी भूमिका निभाने वाले और युवाओं को स्वास्थ्य व शिक्षा के प्रति जागरूक करने वाले कांग्रेस पार्टी के जिला महासचिव डॉ. कुँवर मजहर खान ने क्षेत्रवासियों को ईद-उल-अजहा (बकरीद) की दिली मुबारकबाद दी है। त्योहार की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि यह पर्व अल्लाह की रज़ा के लिए अपनी सबसे अज़ीज़ चीज़ तक कुर्बान कर देने, सब्र, तक़वा और फ़रमाबरदारी का मुक़द्दस पैगाम देता है। त्याग, तस्लीम (समर्पण) और रज़ा-ए-इलाही के आगे सब कुछ न्योछावर कर देने का नाम ही ईद-उल-अजहा है।read more:https://pahaltoday.com/supreme-court-approves-sir-process-in-bihar/
ऐतिहासिक रिवायतों का जिक्र करते हुए डॉ. मजहर खान ने बताया कि हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम को बुज़ुर्गी (वृद्धावस्था) की उम्र में औलाद की नेमत हासिल हुई थी। इसके बाद अल्लाह तआला ने उनके ईमान और फ़रमाबरदारी का इम्तिहान लेने के लिए उन्हें अपने सबसे प्रिय बेटे हज़रत इस्माईल अलैहिस्सलाम को राह-ए-खुदा में कुर्बान करने का हुक्म दिया। हज़रत इब्राहीम इस कड़े इम्तिहान में पूरी तरह कामयाब रहे और अल्लाह ने उनकी इस असीम कुर्बानी व निष्ठा को कुबूल किया। तभी से यह ऐतिहासिक परंपरा चली आ रही है। जिम्मेदार नागरिक बनें, सफाई का रखें विशेष ध्यान इस मुक़द्दस त्योहार के मद्देनजर डॉ. कुँवर मजहर खान ने सभी क्षेत्रवासियों से एक जिम्मेदार शहरी और बा-शऊर मुसलमान होने के नाते विशेष अपील की है। उन्होंने कहा: “हमें इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि कुर्बानी का अमल खुले रास्तों, सड़कों या किसी भी सार्वजनिक जगह पर न किया जाए। कुर्बानी के बाद बचने वाले अवशेषों को इधर-उधर फेंकने के बजाय उन्हें सही तरीके से ज़मीन में दफ़्न किया जाए या फिर नगर निगम द्वारा तयशुदा डस्टबिन व चिन्हित स्थानों पर ही डाला जाए।” उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसा करने से न सिर्फ पर्यावरण और माहौल की पाकीज़गी (सफाई) बरकरार रहेगी, बल्कि हमारे अन्य साथी नागरिकों को भी किसी तरह की असुविधा, बदबू या तकलीफ का सामना नहीं करना पड़ेगा। उन्होंने सभी से शांति, आपसी भाईचारे और सौहार्द के साथ त्योहार मनाने की अपील की है।

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